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12-Oct-2026 08:04 PM
नई दिल्ली। विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्र सतह पर गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाने से सितम्बर में अल नीनो बहुत मजबूत और ताकतवर हो गया। इसके फलस्वरूप वैश्विक स्तर पर औसत तापमान बढ़कर अब तक के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग का खतरा पहले से ही बरकरार है जबकि अल नीनो की वजह से ही विश्व स्तर पर गर्मी बढ़ती जा रही है। इससे दुनिया के देशों में कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है जिसमें भारत भी शामिल है।
अल नीनो का खतरा आगे भी कुछ महीनों तक कायम रहेगा जो दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा दक्षिण अमरीका में अवस्थित देशों पर ज्यादा घातक प्रभाव डाल सकता है। एक तरफ इससे वर्षा में कमी आने की संभावना है तो दूसरी ओर गर्मी बढ़ने की आशंका है। लेकिन अमरीका और खासकर ब्राजील में मौसम अनिश्चित एवं अनियमित रह सकता है।
प्रशांत महासागर से उत्पन्न अल नीनो के असर को हिन्द महासागर का घनात्मक डायपोल काफी हद तक कम कर सकता था लेकिन अभी यह परिपक्व अवस्था में नहीं पहुंच सका है।