यूपी में चीनी मिलों द्वारा सरकार से गन्ना का सैप नहीं बढ़ाने का आग्रह

21-Jan-2025 05:06 PM

लखनऊ । गन्ना किसानों के बीच फैल रहे असंतोष की सुगबुगाहट के बीच उत्तर प्रदेश में प्राइवेट क्षेत्र की चीनी मिलों ने राज्य सरकार से गन्ना के राज्य समर्थित मूल्य (सैप) में 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान कोई बढ़ोत्तरी नहीं करने तथा इसमें यथा स्थिति बनाए रखने का आग्रह किया है।

मिलर्स का कहना है कि गन्ना से चीनी की रिकवरी दर में गिरावट आने के कारण उत्पादन खर्च में भारी इजाफा हो गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के विपरीत उत्तर प्रदेश में प्राइवेट क्षेत्र की मिलों में चीनी का अधिकांश उत्पादन होता है।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान उत्तर प्रदेश में गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में 0.3 से 1.0 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखी जा रही है जिससे चीनी के उत्पादन खर्च में औसतन 140 रुपए प्रति क्विंटल का भारी इजाफा हो रहा है।

मिलर्स का कहना है कि एक तरफ चीनी का लागत खर्च काफी ऊंचा हो गया है जबकि दूसरी ओर इसके घरेलू बाजार मूल्य में दिसम्बर 2024 तक कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी। 

उल्लेखनीय है कि देश के पांच प्रांतों में गन्ना का राज्य समर्थित मूल्य (सैप) नियत करने का प्रचलन है जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड एवं तमिलनाडु शामिल हैं।

यह सैप केन्द्र सरकार द्वारा घोषित गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) से ऊंचा होता है। वर्ष 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश में गन्ना की सभी किस्मों के लिए सैप में 20 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई थी। अगैती बिजाई वाली श्रेणी के गन्ना का सैप 370 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। 

ध्यान देने वाली बात है कि उत्तर प्रदेश देश में गन्ना का सबसे बड़ा तथा चीनी का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।

वहां गन्ना का क्षेत्रफल भी अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक रहता है जबकि प्राइवेट चीनी मिलों की सबसे अधिक संख्या भी उत्तर प्रदेश में ही है।

उत्तर प्रदेश में कुल 120 चीनी मिलों में से करीब 93 इकाइयां प्राइवेट क्षेत्र में स्थित हैं जबकि सहकारी क्षेत्र में 24 तथा उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीनस्थ तीन मिलें शामिल हैं।