वित्त वर्ष 2025-26 में चावल के निर्यात में 7.5 प्रतिशत की गिरावट

23-Apr-2026 07:19 PM

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भारतीय चावल के निर्यात पर देखा जा रहा है। मार्च में इसका शिपमेंट काफी घट गया। ईरान भारतीय बासमती चावल का अग्रणी आयातक देश है मगर वह मार्च 2026 में अमरीका और इजरायल के साथ युद्ध में उलझा रहा। इसके फलस्वरूप चावल आयात के आर्डर में कमी आ गई और भुगतान की अनिश्चितता बढ़ गई। शिपिंग में गतिरोध उत्पन्न होना भी चावल निर्यात में गिरावट आने का एक महत्वपूर्ण कारण रहा। 

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान भारत से कुल 11.53 अरब डॉलर मूल्य के चावल का निर्यात हुआ जो वित्त वर्ष 2024-25 की सकल निर्यात आय से 7.5 प्रतिशत कम रहा। इसमें बासमती एवं गैर बासमती चावल की सभी किस्मों एवं श्रेणियां शामिल हैं। मध्य पूर्व के देशों में निर्यात प्रदर्शन कमजोर पड़ गया जबकि उससे पूर्व अमरीका में भी 50 प्रतिशत सीमा शुल्क के कारण निर्यात की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई थी। 

मार्च 2025 की तुलना में मार्च 2026 के दौरान भारतीय चावल की निर्यात आय 15.36 प्रतिशत घटकर 99.753 करोड़ डॉलर पर अटक गई। पश्चिम एशिया में अमरीका और इजरायल के साथ मार्च में ईरान का भयंकर युद्ध जारी रहने से मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख आयातक देशों- ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक एवं ओमान आदि में भारत से खासकर बासमती चावल का निर्यात कुछ हद तक प्रभावित हुआ।

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार ईरान सहित कुछ अन्य देशों के आयातकों ने भारतीय निर्यातकों को सूचित कर दिया कि वे मौजूदा अनुबंधों के तहत चावल का आयात करने में असमर्थ हैं और चावल के मूल्य का भुगतान भी नहीं कर सकते हैं। इसके बाद वहां चावल के निर्यात में अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई। 

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से दुनिया के 172 देशों में करीब 12.50 अरब डॉलर मूल्य के लगभग 201 लाख टन चावल का निर्यात किया गया था।