वैश्विक बाजार मूल्य में तेजी का भारतीय रूई पर असर
09-Sep-2026 08:03 PM
अहमदाबाद। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के दाम में उतार-चढ़ाव का माहौल देखा जा रहा है। भारत में 31 अक्टूबर 2026 तक रूई के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है और इसका फायदा उठाते हुए आयातक विशाल मात्रा में इसका आयात भी कर रहे हैं। इसके प्रभाव से घरेलू बाजार में रूई की कीमत आमतौर पर मजबूत बनी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा पीक सीजन में देश के अंदर 4 सितम्बर तक कपास का उत्पादन क्षेत्र 109.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 109.87 लाख हेक्टेयर से 70 हजार हेक्टेयर कम रहा। अधिकांश इलाकों में बिजाई समाप्त हो चुकी है इसलिए आगे इसके रकबे में ज्यादा सुधार आने की गुंजाईश नहीं है। कहीं-कहीं छिटपुट बिजाई अभी जारी है।
कपास की अगैती बिजाई वाली फसल से रूई की तुड़ाई-तैयारी कुछ राज्यों में आरंभ हो गई है। फसल की हालत संतोषजनक बताई जा रही है लेकिन कहीं-कहीं इसे थोड़ा-बहुत नुकसान होने की आशंका भी है। पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में कपास की अगैती खेती (अप्रैल-मई में) होती है इसलिए वहां फसल की आवक सितम्बर में ही शुरू हो जाती है। इसी तरह कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं गुजरात जैसे राज्यों को कुछ भागों में भी रूई की आवक होने की सूचना मिल रही है। आगे आपूर्ति की रफ्तार बढ़ेगी।
