वर्षा की कमी से महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10 प्रतिशत घटा
14-Sep-2026 10:43 AM
नागपुर। बिजाई क्षेत्र की दृष्टि से भारत के सबसे अग्रणी कपास उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में इस बार सही समय पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की पर्याप्त वर्षा नहीं होने से इस महत्वपूर्ण रेशेदार औद्योगिक फसल के क्षेत्रफल में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। देश में कपास का लगभग 38 प्रतिशत रकबा महाराष्ट्र में रहता है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार यद्यपि महाराष्ट्र में चालू खरीफ सीजन के दौरान कपास का उत्पादन क्षेत्र 38.37 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के बिजाई क्षेत्र 38.41 लाख हेक्टेयर से महज 4 हजार हेक्टेयर कम है लेकिन पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल की तुलना में 4 लाख हेक्टेयर से ज्यादा पीछे रह गया। इस बार महाराष्ट्र में कपास का सामान्य औसत क्षेत्रफल 42.50 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
उल्लेखनीय है कि सोयाबीन, तुवर, गन्ना एवं मक्का की भांति कपास भी महाराष्ट्र की एक अग्रिम पंक्ति की खरीफ फसल है। महाराष्ट्र में औसतन 140 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की खेती होती है जिसमें अकेले कपास के बिजाई क्षेत्र की भागीदारी 30 प्रतिशत के आसपास रहती है। इस बार बारिश की कमी के कारण महाराष्ट्र में कपास की औसत उपज दर एवं पैदावार के प्रति गहरी चिंता बनी हुई है।
महाराष्ट्र के नासिक डिवीजन में कपास की फसल पर कमजोर वर्षा का ज्यादा प्रतिकूल असर देखा जा रहा है। वहां इसके बिजाई क्षेत्र में करीब 24 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। नासिक डिवीजन में जलगांव, धुले, नंदूरबार एंव नासिक जिले शामिल हैं। इस डिवीजन में कपास का रकबा 9.30 लाख हेक्टेयर से 1.82 लाख हेक्टेयर घटकर 7.48 लाख हेक्टेयर रह गया।
महाराष्ट्र में कपास के अग्रणी उत्पादक जिलों में शामिल- जलगांव में इसका रकबा 4.30 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 5.50 लाख हेक्टेयर से काफी कम है।
