वर्ष 2030 तक भारत से हल्दी का सालाना निर्यात 1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
15-Jan-2025 05:53 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने वर्ष 2030 तक हल्दी का सालाना निर्यात बढ़कर 1 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचने की उम्मीद जताई है। 14 जनवरी 2025 को मकर संक्रांति के दिन केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री ने तेलंगाना के निजामाबाद में राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड का उट्घाटन करते हुए
कहा कि देश में हल्दी तथा उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों का उत्पादन तथा गुणवत्ता विकास में यह बोर्ड हर संभव सहायता प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि हल्दी उत्पादक लम्बे समय से इस बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे जिसे अब पूरा कर दिया गया है।
उत्तरी तेलंगाना में अवस्थित निजामाबाद हल्दी का एक प्रमुख उत्पादक एवं व्यावसायिक केन्द्र है इसलिए वहीं पर बोर्ड का मुख्यालय बनाया गया है।
तम्बाकू बोर्ड की तर्ज पर स्थापित यह हल्दी बोर्ड मसाला बोर्ड तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा सरकार को भरोसा है कि बोर्ड के अस्तित्व में आने से भारतीय हल्दी के उत्पादन एवं निर्यातक को मजबूत सहारा मिलेगा।
केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री के अनुसार यह नया बोर्ड हल्दी के नए-नए उत्पादों के लिए अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देगा और विदेशों में निर्यात बढ़ाने के लिए मूल्य संवर्धित उत्पादों पर विशेष ध्यान रखेगा।
हल्दी सिर्फ एक महत्वपूर्ण मसाला ही नहीं है बल्कि इसके अनेक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं और यह स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त लाभदायक भी है।
भारत दुनिया में हल्दी का सबसे प्रमुख उत्पादक, खपतकर्ता एवं निर्यातक देश है। पिछले साल देश में इसका बिजाई क्षेत्र 3.05 लाख हेक्टेयर तथा कुल उत्पादन 10.74 लाख टन दर्ज किया गया था जो कुल वैश्विक उत्पादन के 75 प्रतिशत से भी अधिक था। भारत में 30 से अधिक किस्मों की हल्दी का उत्पादन होता है।
हालांकि देश के 20 से अधिक राज्यों में हल्दी की खेती होती है लेकिन ज्यादातर उत्पादन तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटका, तमिलनाडु एवं उड़ीसा में ही होता है। भारत में उत्पादित हल्दी के महज 10-15 प्रतिशत भाग का ही विदेशों में निर्यात हो रहा है।
भारत से वित्त वर्ष 2021-22 में 1.53 लाख टन हल्दी का निर्यात हुआ था जो 2022-23 में बढ़कर 1.70 लाख टन पर पहुंच गया। इससे 20 करोड़ 74 लाख 50 हजार डॉलर की आमदनी हुई थी।
भारतीय हल्दी के प्रमुख आयातक देशों में बांग्ला देश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), अमरीका, मलेशिया एवं चीन आदि शामिल है। पश्चिम एशिया के अनेक देश भी इसकी भारी खरीद करते हैं।
