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03-Nov-2026 05:27 PM
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा का चुनाव होने वाला है जिसे देखते हुए राज्य सरकार धड़ाधड़ नई-नई योजनाओं, नीतियों एवं निर्णयों की घोषणा कर रही है। इसी श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में अब वहां गन्ना के 'राज्य समर्थित मूल्य' (सैप) में बढ़ोत्तरी करने पर विचार किया जा रहा है ताकि विशाल कृषक समुदाय को खुश किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश देश में गन्ना का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। वह देश के ऐसे पांच राज्यों में शामिल है जहां गन्ना के लिए केन्द्र सरकार द्वारा उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के साथ प्रांतीय सरकार द्वारा राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) का भी निर्धारित किया जाता है। वैसे प्रत्येक वर्ष सैप में वृद्धि किया जाना आवश्यक नहीं है लेकिन जब अहम मौका सामने हो तो सरकार उसका पूरा फायदा उठाने का भरपूर प्रयास अवश्य करना चाहेगी। लेकिन गन्ना के सैप में वृद्धि के लिए पैच है।
उत्तर प्रदेश में फिलहाल गन्ना का सैप 400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। किसान संगठन इसे 100 रुपए बढ़ाकर 500 रुपए प्रति क्विंटल नियत करने की जोरदार मांग कर रहा है जबकि चीनी उद्योग उसका विरोध कर रहा है। मिलर्स का कहना है कि गन्ना का सैप पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है इसलिए अब इसमें और इजाफा नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार को यह तथ्य ध्यान में रखना चाहिए कि केन्द्र द्वारा पिछले छह-सात साल से चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य में कोई बदलाव या इजाफा नहीं किया गया है और यह 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर ही स्थिर बना हुआ है। दूसरी ओर चीनी के उत्पादन खर्च में भारी वृद्धि हो चुकी है और इस बार सरकार ने गन्ना अवयवों से एथनॉल के निर्माण पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। सरकार के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।