Home News
31-Oct-2026 12:30 PM
नई दिल्ली। खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र 3.7 प्रतिशत घटने तथा दक्षिण- पश्चिम मानसून की बारिश 13 प्रतिशत कम होने से चावल के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। अल नीनो मौसम चक्र का प्रभाव बरकरार रहने से रबी सीजन में भी धान-चावल का उत्पादन संतोषजनक रहने में संदेह है। दूसरी ओर चावल की घरेलू एवं निर्यात मांग मजबूत बनी हुई है जिससे इसकी कीमतों में तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। सामान्य श्रेणी के साथ-साथ बासमती धान-चावल का दाम भी ऊंचा चल रहा है।
चावल की विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के बाजार मूल्य में पिछले एक-डेढ़ माह से तेजी-मजबूती का माहौल बना हुआ है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना है। उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार 30 अक्टूबर 2026 को अखिल भारतीय स्तर पर चावल का औसत खुदर मूल्य बढ़कर 48.25 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया जो गत वर्ष की इसी तिथि को प्रचलित मूल्य से 12 प्रतिशत ऊंचा है।
खरीफ कालीन धान की फसल की हालत मिश्रित देखी जा रही है। पंजाब-हरियाणा में स्थिति बेहतर है। छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश में भी हालत सामान्य बताई जा रही है मगर तेलंगाना एवं उड़ीसा सहित अन्य प्रांतों में फसल की दशा ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं आंकी जा रही है। इससे धान की उपज दर में 4-5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान की नई फसल की कटाई-तैयारी पहले ही आरंभ हो चुकी है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 के मुकाबले 2026 के खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र लगभग 4 प्रतिशत घटकर 426.80 लाख हेक्टेयर रह गया दक्षिण भारत के चारों प्रमुख उत्पादक राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में धान का रकबा घट गया।
2026-27 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (खरीफ के रबी) के दौरान चावल का घरेलू उत्पादन घटकर 14.70 करोड़ टन पर सिमट जाने का अनुमान है जो 2025-26 सीजन के कुल उत्पादन 15.40 करोड़ टन से काफी कम है। दक्षिण तथा अफ्रीका के अनेक देशों में भारतीय चावल की जोरदार मांग देखी जा रही है क्योंकि इसका दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर मौजूद है।