उर्वरकों का आयात खर्च तेजी से बढ़ने की संभावना
27-May-2026 01:35 PM
नई दिल्ली। ईरान अमरीका के बीच जारी तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से भारत को लम्बे रास्ते से एवं ऊंचे दाम पर रासायनिक उर्वरकों का आयात करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इससे आयात खर्च में भारी इजाफा होने की संभावना है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2026-27 के खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की घरेलू मांग बढ़कर 3 करोड़ 90 लाख 54 हजार टन पर पहुंच जाने का अनुमान है। स्वदेशी उत्पादन सीमित होने से भारत को प्रति वर्ष विदेशों से अत्यन्त विशाल मात्रा में रासायनिक खाद का आयात करना पड़ता है। इस बार ऊंचे दाम पर आयात हो रहा है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार रासायनिक उर्वकरों का कुल आयात खर्च 2025-26 के वित्त वर्ष में 27 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। इससे पूर्व वित्त वर्ष 2022-23 में आयात खर्च 33.40 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था जबकि 2026-27 का आयात खर्च उससे भी आगे निकल जाने की संभावना है।
2025-26 के वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) में भारत द्वारा 282 लाख टन उर्वरकों का आयात किया गया जिसमें 112 लाख टन यूरिया, 64 लाख टन डीएपी एवं 37 लाख टन एमओपी भी शामिल था। भारत को उर्वरकों के घरेलू उत्पादन के लिए बाहर से कच्चा माल भी मंगाना पड़ता है।
