कपास के बिजाई क्षेत्र में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान
27-May-2026 01:33 PM
मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2025-26 सीजन के मुकाबले 2026-27 सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कपास के उत्पादन क्षेत्र में करीब 7 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की है।
हाल के सप्ताहों में रूई के दाम में अच्छी बढ़ोत्तरी होने से किसानों को लाभप्रद वापसी हासिल हो रही है जिससे कपास की खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ने के आसार हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं फसल समिति के चेयरमैन का कहना है कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों की धारणा के बारे में जो रिपोर्ट मिल रही है वह काफी हद तक उत्साहवर्धक है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के खरीफ सीजन के दौरान देश में कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र 114.82 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था जो 2026-27 के सीजन में बढ़ सकता है। केन्द्र सरकार ने कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार 557 रुपए बढ़ाकर मीडियम रेशेवाली श्रेणी का 8267 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों का 8667 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। नया एमएसपी अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो जाएगा।
केन्द्र सरकार कुछ महीनों तक रूई पर लागू 11 प्रतिशत के आयात शुल्क को स्थगित रखने पर विचार कर रही है। रूई की आवक का ऑफ सीजन तथा बिजाई का पीक सीजन रहने के कारण इन महीनों में रूई का शुल्क मुक्त आयात होने पर भी किसानों को कोई खास नुकसान नहीं होगा जबकि दूसरी और टेक्सटाइल उद्योग को कुछ राहत मिल जाएगी।
एसोसिएशन ने 2025-26 सीजन के दौरान देश में 334 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई का संशोधित उत्पादन अनुमान लगाया है जबकि इसका आयात 2024-25 सीजन के 41 लाख गांठ से 15 प्रतिशत बढ़कर 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में 47 लाख गांठ पर पहुंच जाने की संभावना व्यक्त की है। दूसरी ओर रूई के निर्यात का अनुमान 18 लाख गांठ के पिछले स्तर पर बरकरार रखा गया है।
