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23-Sep-2026 01:41 PM
नई दिल्ली। अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून के कारण इस वर्ष धान के उत्पादन क्षेत्र में जून से ही गिरावट का जो सिलसिला आरम्भ हुआ वह सितम्बर तक बरकरार रहा। आधिकारिक आकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न - धान का उत्पादन क्षेत्र इस बार 18 सितम्बर तक घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गया जो पिछले साल की इसी अवधि के रिकॉर्ड रकबा 445.92 लाख हेक्टेयर से 16.64 लाख हेक्टेयर या करीब 4 प्रतिशत कम है। ध्यान देने की बात है कि धान का यह रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 405.36 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है। पिछले साल का रकबा एक अपवाद था जब यह तेजी से उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था।
इस वर्ष समस्या केवल धान के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट तक ही सीमित नहीं है बल्कि मानसून की कम बारिश होने से कई राज्यों में फसल के विकास में बाधा भी पड़ रही है। इसके फलस्वरूप खासकर दक्षिण भारत में फसल की हालत कमजोर बताई जा रही है। वहां तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। संयोग से इस बार इन चारों राज्यों में ही धान के रकबे में कमी आई है। इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखण्ड जैसे राज्यों में भी धान का क्षेत्रफल घटा है। जानकारों का कहना है की 2025-26 की तुलना में 2026-27 के सम्पूर्ण सीजन के दौरान चावल के सकल उत्पादन में 100 लाख टन तक की भारी गिरावट आ सकती है।