Home News

खाद्य तेलों का वैश्विक बाजार भाव अस्थिर रहने की संभावना

23-Sep-2026 12:43 PM

खाद्य तेलों का वैश्विक बाजार भाव अस्थिर रहने की संभावना

मुंबई। विभिन्न कारणों से आगामी महीनों के दौरान खाद्य तेलों के वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, जबकि आम तौर पर कीमतों में मजबूती की धारणा बन रही है। अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता और इंडोनेशिया में बी-50 बायोडीजल प्रोग्राम आदि के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वनस्पति तेलों की मांग एवं आपूर्ति के बीच गहरा असंतुलन पैदा हो सकता है। इससे कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल जारी रहने की संभावना है।

एक अग्रणी उद्योग व्यापार संगठन—सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष का कहना है कि वनस्पति तेलों की आपूर्ति कम होने से भारत जैसे शीर्ष आयातक देशों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत में पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का विशाल आयात होता है और देश के अंदर लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेल की मांग एवं जरूरत विदेशों से आयात के जरिए ही पूरी की जाती है। वैश्विक बाजार की हलचल का भारतीय खाद्य तेल बाजार पर सीधा और गहरा असर पड़ता है।

एसोसिएशन इस संबंध में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को पहले ही सूचित कर चुका है। समझा जाता है कि सरकार इस संकट से उबरने के लिए खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रही है। खाद्य तेलों के आयात में भारी गिरावट आ रही है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए सोयाबीन तेल एवं पाम तेल का आयात बढ़ाया जा रहा है, जिससे इनके मूल्य में वृद्धि होने के संकेत मिल रहे हैं। समुद्री परिवहन खर्च ऊंचा हो गया है, जबकि डॉलर की तुलना में रुपये की कीमत काफी घट गई है। इससे घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम बढ़ने की संभावना है।

केंद्रीय खाद्य सचिव को वनस्पति तेलों के वर्तमान स्टॉक एवं आपूर्ति की स्थिति के बारे में एसोसिएशन ने विस्तार से जानकारी दे दी है और अब सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा की जा रही है।