दूसरी छमाही में पाम तेल की वैश्विक आपूर्ति घटने का अनुमान
22-Apr-2026 01:32 PM
मुम्बई। दुनिया में पाम तेल के सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- इंडोनेशिया में 1 जुलाई 2026 से बायोडीजल निर्माण में 50 प्रतिशत क्रूड पाम तेल (सीपीओ) के अनिवार्य मिश्रण का नियम (बी 50 प्रोग्राम) लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे वहां पाम तेल का निर्यात योग्य स्टॉक घट जाएगा और वैश्विक बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल हो जाएगी।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अनुसार इंडोनेशिया में बी 50 प्रोग्राम लागू होने, अल नीनो मौसम चक्र का प्रकोप रहने तथा जियो पोलिटिकल टेंशन रहने से पाम तेल बाजार में संकुचन पैदा हो सकता है। इससे कीमतों में कुछ तेजी मजबूती आने की संभावना भी रहेगी।
इंडोनेशिया एवं मलेशिया दुनिया के दो सबसे प्रमुख पाम तेल उत्पादक एवं निर्यातक देश हैं। पाम तेल का वैश्विक वार्षिक उत्पादन 820 लाख टन के करीब रहता है। भारत में प्रतिवर्ष औसतन 90-95 लाख टन पाम तेल का आयात किया जाता है जिससे घरेलू जरूरत पूरी होती है।
इस वर्ष इंडोनेशिया में बी 50 प्रोग्राम, मलेशिया में बी 15 एवं थाईलैंड में बी 20 प्रोग्राम लागू होने पर पाम तेल के वैश्विक निर्यात कारोबार में गिरावट आने की संभावना है। अल नीनो मौसम चक्र का असर दक्षिण एशिया (भारत) के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया एवं सुदूर पूर्व एशिया (थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया) पर भी पड़ने की संभावना है। इससे वहां पाम तेल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
यह परिस्थिति उस समय उत्पन्न हो रही है जब भारत में विदेशी खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता काफी ऊंची है और घरेलू प्रभाग में उसका दाम भी तेज चल रहा है। हाल के महीनों में पाम तेल का आयात कम हुआ है लेकिन आगे इसे बढ़ाने की आवश्यकता पड़ेगी।
