दस लाख टन के निर्यात की अनुमति दिए जाने से चीनी का भाव तेज होने की उम्मीद
21-Jan-2025 03:18 PM
नई दिल्ली । स्वदेशी उद्योग के जोरदार आग्रह को देखते हुए केन्द्र सरकार ने उत्पादन, स्टॉक तथा उपयोग के तमाम संभावित आंकड़ों का गहन अध्ययन- विश्लेषण करने के बाद 2024-25 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान मिलर्स को 10 लाख टन चीनी का निर्यात करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
लेकिन व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि मांग एवं आपूर्ति का समीकरण काफी जटिल होने से चीनी का घरेलू बाजार भाव आगामी महीनों में ऊंचा एवं तेज रह सकता है।
सरकारी तौर पर जो अनुमान लगाया गया है उसके तहत चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभ में यानी 1 अक्टूबर 2024 को स्वदेशी उद्योग के पास 79 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था जबकि सीजन के दौरान 320 लाख टन का उत्पादन हो सकता है। इससे चीनी की कुल उपलब्धता 399 लाख टन पर पहुंचेगी।
इसमें से 40 लाख टन का उपयोग एथनॉल निर्माण में किया जाएगा और 359 लाख टन का स्टॉक बचेगा। सरकार ने चीनी की घरेलू खपत 290 लाख टन होने का अनुमान लगाया है जिसके बाद 69 लाख टन का स्टॉक बचेगा। इसमें से 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है।
इस तरह कुल समीकरण पूरा होने के बाद चालू मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2025 को उद्योग के पास 59 लाख टन चीनी का अधिशेष स्टॉक बच जाएगा जो 2025-26 के मार्केटिंग सीजन के शुरूआती ढाई-तीन माह की घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में चीनी का वास्तविक उत्पादन 320 लाख टन तक पहुंचता है या नहीं।
2023-24 सीजन की तुलना में इस बार चीनी का उत्पादन 320 लाख टन तक पहुंचता है या नहीं। 2023-24 सीजन की तुलना में इस बार चीनी का उत्पादन काफी पीछे चल रहा है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज ने चीनी का उत्पादन पिछले सीजन के 319 लाख टन से 49 लाख टन लुढ़ककर इस बार 270 लाख टन पर सिमटने का अनुमान लगाया है।
कई अन्य उद्योग समीक्षक भी चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। इससे आपूर्ति व्यवस्था में जटिलता बढ़ सकती है।
