दलहन बाजारों में असमंजस की स्थिति: सरकार खरीद नीति पर गंभीर
22-Jan-2025 06:27 PM
दलहन बाजारों में असमंजस की स्थिति: सरकार खरीद नीति पर गंभीर
मुख्य बिंदु:
1. पिछले सीजन की स्थिति
- मसूर, मूंग, चना, उड़द, और तुवर की MSP से अधिक कीमतों के कारण सरकार ने इनकी बड़ी मात्रा में खरीद नहीं की।
- बीते रबी सीजन में कुल दलहनों की खरीद- 6.41 लाख टन (मसूर- 2.49 लाख टन, चना- 43,000 टन, मूंग- 3.48 लाख टन) हो पाई।
- इसका परिणाम यह हुआ कि देश में दलहनों का बफर स्टॉक घट गया।
2. वर्तमान स्थिति
- बफर स्टॉक में मसूर और मूंग का स्टॉक सामान्य से कम है, जबकि अन्य दलहनों का स्टॉक लगभग खत्म।
- सरकार ने MSP में वृद्धि करते हुए दलहन की खरीद को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
3. खरीफ दलहन खरीद
- इस समय उड़द, मूंग, और तुवर की खरीद की जा रही है।
- सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह उड़द, मसूर, और तुवर की 100% फसल खरीदने को तैयार।
- कर्नाटक सरकार ने तुवर पर ₹450 का बोनस (कुल ₹8,000/क्विंटल) देने की घोषणा की।
- महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्य में अभी तक खरीद का लक्ष्य तय नहीं किया गया।
4. खरीद के लिए नई योजना
- सरकार ने घोषणा की है कि यदि MSP से अधिक कीमतें होती हैं या खरीद में कठिनाई होती है, तो खरीद पिछले तीन दिनों के औसत मंडी भाव पर की जाएगी।
- यह खरीद MAPP (Minimum Assurance Procurement Prices) स्कीम के तहत की जाएगी।
5. दलहनों की MSP (₹/क्विंटल):
- तुवर: 7,550 (8,000 कर्नाटक में)
- मूंग: 8,682
- उड़द: 7,400
- चना: 5,650
- मसूर: 6,700
6. खरीफ खरीद के आंकड़े (14 जनवरी तक):
- मूंग: 1.67 लाख टन
- उड़द: 31.25 टन
- तुवर: 0
विश्लेषण:
- मूंग के किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर माल कम ला रहे।
- उड़द के दाम MSP से अधिक होने के कारण इसकी खरीद कम हुई।
- तुवर के किसान वर्तमान में कम कीमतों पर माल बेचने को तैयार नहीं।
7. प्रमुख चुनौतियां:
- पिछले दो वर्षों में तुवर की ऊँची कीमतों के बाद इस बार भाव कम होने से किसान माल नहीं बेच रहे।
- अच्छा उत्पादन होने के बावजूद मंडियों में आवक धीमी है, खासकर विदर्भ क्षेत्र में।
8. वर्तमान विपरीत स्थिति:
- आयातित और घरेलू उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है, जिससे दलहनों की उपलब्धता पर्याप्त।
- किसान कम दामों पर माल बेचने को तैयार नहीं।
- सरकार गंभीरता से खरीद कर रही है।
- मिलर्स को पर्याप्त माल नहीं मिल रहा।
- निर्यातक और स्टॉकिस्ट ऊँचे भाव पर खरीदे गए माल को बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे।
- कम भाव होने के बावजूद बाजार में खरीदारी कमजोर।
निष्कर्ष:
वर्तमान में दलहन बाजार में उत्पादन, आयात, और सरकारी खरीद के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसानों और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नीतियों में लचीलापन और बाजार में स्थिरता लाने की आवश्यकता है।
