दाल-दलहन की मांग एवं आपूर्ति में अंतर कुछ महीनों तक बरकरार रहने की संभावना

21-May-2024 12:25 PM

मुम्बई । हालांकि केन्द्र सरकार ने घरेलू प्रभाग में दाल-दलहनों की आपूर्ति- उपलब्धता बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख दलहनों-तुवर, उड़द, मसूर, देसी चना एवं मटर के आयात को शुल्क मुक्त कर दिया है और व्यापारियों- स्टॉकिस्टों तथा दाल मिलर्स पर भी कुछ नियंत्रण लगाया है लेकिन इसके बावजूद कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं आ रही है।

पीली मटर का विशाल आयात चना के दाम को नीचे आने में कारगर साबित नहीं हो पाया है। दरअसल आयात सरकारी प्रयासों के बावजूद दलहनों की मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर बना हुआ है इसलिए कीमतों में मजबूती कायम है।


उद्योग- व्यापार समीक्षकों के मुताबिक खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई अगले महीने से आरंभ होगी और इस बार ऊंचे दाम तथा अनुकूल मौसम की संभावना को देखते हुए बिजाई क्षेत्र में इजाफा होने के आसार है जिससे उत्पादन बेहतर हो सकता है।

लेकिन नई फसल की आवक अक्टूबर में आरंभ होगी और तब तक बाजार में तेजी-मजबूती को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। विदेशों से दलहनों का सीमित आयात हो रहा है क्योंकि निर्यातक देशों में आपूर्ति का ऑफ सीजन चल रहा है।

कनाडा में मसूर-मटर का नया माल अगस्त-सितम्बर में ऑस्ट्रेलिया मसूर एवं चना का नया माल अक्टूबर-नवम्बर में आएगा। अफ्रीकी देशों में तुवर की नई फसल अगस्त से आनी  शुरू हो जाती है।

इस बार अफ्रीका के सबसे प्रमुख तुवर उत्पादक देश- मोजाम्बिक के कई महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में भयंकर बाढ़ आने से फसल की बिजाई एवं प्रगति बाधित होने की सूचना मिल रही है।

पिछले खरीफ सीजन में तुवर एवं उड़द का उत्पादन कम हुआ था जिससे कीमतों में भारी तेजी आई गई थी। रबी सीजन में भी उम्मीद के अनुरूप चना का उत्पादन नहीं हुआ और सरकार के पास भी इसका सीमित स्टॉक बचा हुआ है।

किसान चना का स्टॉक दबाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे मंडियों में आपूर्ति का दबाव नहीं बन रहा है।