दाल-दलहन की कीमतों पर अनेक कारक डालते हैं प्रभाव
08-Apr-2024 08:35 PM
नई दिल्ली । भारत दुनिया में दलहनों का सबसे प्रमुख उत्पादक, उपयोगकर्ता एवं आयातक देश है। यहां विशाल मात्रा में चना, तुवर, उड़द, मूंग एवं मसूर सहित अन्य दलहनों का वार्षिक उत्पादन होता है मगर घरेलू मांग एवं खपत उससे भी ज्यादा होने से विदेशों से इसका भारी आयात करना पड़ता है।
उत्पादन एवं उपयोग में आने वाले अंतर के अनुरूप कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है जबकि कई बार विदेशी बाजारों की तेजी-मंदी से भी घरेलू बाजार भाव प्रभावित होता है।
अब सरकारी प्रयासों से दाल-दलहन बाजार में काफी हद तक स्थिरता का माहौल बनाने लगा है लेकिन तुवर का भाव अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बरकरार है जिसे नीचे लाने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
दलहनों का उत्पादन अनेक कारको से संचालित होता है जिसमें मौसम, बाजार भाव एवं सरकार की नीति आदि शामिल है। सरकार प्रत्येक वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी के जरिए किसानों को दलहनों का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित- प्रोत्साहित करती है लेकिन देश में कभी वर्षा का अभाव होने, अनियमित बारिश होने,
कभी जोरदार बरसात होने, कभी सूखा पड़ने तो कभी अन्य प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप होने से दलहनों का अपेक्षित उत्पादन कहां हो पाता है। इसके बावजूद हाल के वर्षों में दलहन फसलों के घरेलू उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है मगर मांग एवं खपत इससे तेज रफ्तार से बढ़ी है।
दरअसल भारत में दलहनों की औसत उपज दर कम होने से विशाल क्षेत्रफल के बावजूद उत्पादन उम्मीद से अनुरूप नहीं हो पाता है। सरकार अब इस तरफ गम्भीरतापूर्वक ध्यान दे रही है। दलहनों का कारोबार सामान्य ढंग से होता रहे।
इसके लिए भी अनेक कदम उठाए गए है। साथ ही साथ विदेशों से तुवर, उड़द, मसूर तथा पीली मटर की आपूर्ति सुगम बनाने के लिए इसके आयात को शुल्क मुक्त एवं नियंत्रण मुक्त कर दिया गया है।
भारत में दलहनों का उत्पादन तीन सीजन-खरीफ, रबी एवं जायद में होता है। जब मौसम अनुकूल रहता है तब इसका उत्पादन भी बेहतर होता है।
