टेक्सटाइल उत्पादों एवं अपारेल के वैश्विक कारोबार में भारत की भागीदारी 4 प्रतिशत के करीब

02-Jan-2025 06:07 PM

नई दिल्ली । केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय का कहना है कि वर्ष 2023 के दौरान भारत दुनिया में टेक्सटाइल उत्पादों एवं अपारेल (सिले सिलाए वस्त्रों) का छठा सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना रहा।

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत के सकल निर्यात में हैंडक्राफ्ट सहित टेक्सटाइल उत्पादों एवं अपारेल की भागीदारी 8.21 प्रतिशत दर्ज की गई।

इसके वैश्विक निर्यात कारोबार में भारत 3.9 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। भारत से इन उत्पादों के निर्यात का प्रमुख बाजार अमरीका तथा यूरोपीय संघ है।

भारत टेक्सटाइल उत्पादों का एक अग्रणी निर्यातक देश है। वस्त्रों के आयात-निर्यात में भारत सरप्लस की स्थिति में रहता है।

विदेशों से जो आयात होता है उसके अधिकांश भाग का या तो पुनः निर्यात कर दिया जाता है या फिर कच्चे माल के तौर पर उद्योग की जरूरतों को पूरा करता है। 

कपड़ा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 के आरंभिक सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान देश से कुल 21,358 मिलियन डॉलर मूल्य के वस्त्र उत्पादों का निर्यात हुआ जिसमें रेडीमेड गारमेंट्स का योगदान सबसे अधिक 8733 मिलियन डॉलर या 41 प्रतिशत रहा।

इसके बाद कॉटन टेक्सटाइल की भागीदारी 7082 मिलियन डॉलर या 33 प्रतिशत तथा मनुष्य निर्मित वस्त्रों की हिस्सेदारी 3105 मिलियन डॉलर या 15 प्रतिशत दर्ज की गई। भारत से रूई का निर्यात भी बड़े पैमाने पर होता है। 

वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत में टेक्सटाइल एवं अपारेल उत्पादों का कुल आयात घटकर 8946 मिलियन डॉलर पर अटक गया जो वित्त वर्ष 2022-23 के कुल आयात 10,481 मिलियन डॉलर से 15 प्रतिशत कम रहा।

इन आंकड़ों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत में आयात के मुकाबले भारत से निर्यात का स्तर काफी ऊंचा रहता है। 

अक्टूबर 2023 की तुलना में 2024 के दौरान रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात 909 मिलियन डॉलर से 35 प्रतिशत उछलकर 1227 मिलियन डॉलर,

कॉटन टेक्सटाइल का निर्यात 1005 मिलियन डॉलर से 4 प्रतिशत सुधरकर 1049 मिलियन डॉलर तथा मैन मेड टेक्सटाइल का निर्यात 414 मिलियन डॉलर से 14 प्रतिशत बढ़कर 474 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया।