सरकारी प्रयासों के बावजूद दलहनों के बिजाई क्षेत्र में 23 प्रतिशत की गिरावट
14-Jul-2026 12:41 PM
नई दिल्ली। हालांकि अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चित एवं अनियमित स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार इस बार खरीफ सीजन में दलहन-तिलहन फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है और सप्ताह-दर-सप्ताह दलहनों के रकबे में सुधार भी हो रहा है मगर गत वर्ष की तुलना में रकबा अभी बहुत पीछे है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 10 जुलाई तक 56.63 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 73.85 लाख हेक्टेयर से 17.22 लाख हेक्टेयर या 23.32 प्रतिशत कम है। दलहनों का सामान्य औसत क्षेत्रफल इस बार 123.64 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा इसके 50 प्रतिशत भाग तक भी नहीं पहुंच पाया है। दलहन फसलों की बिजाई के लिए आदर्श समय तेजी से बीतता जा रहा है। तीनों प्रमुख दलहनों- तुवर, उड़द एवं मूंग के साथ-साथ मोठ की बिजाई में भी भारी कमी देखी जा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 28.03 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.34 लाख हेक्टेयर, मूंग का क्षेत्रफल 24.08 लाख हेक्टेयर से गिरकर 21.52 लाख हेक्टेयर तथा मोठ का रकबा 6.12 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 4.40 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह अन्य दलहन फसलों की बिजाई भी 2.20 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस बार 1.70 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सकी।
चालू खरीफ सीजन के लिए पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल अरहर के लिए 44.32 लाख हेक्टेयर, उड़द के लिए 29.60 लाख हेक्टेयर, मूंग के लिए 35.48 लाख हेक्टेयर, मोठ के लिए 9.69 लाख हेक्टेयर, कुलथी के लिए 1.48 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों के लिए 3.07 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
