मक्का और बाजरा की वजह से मोटे अनाजों के रकबे में जोरदार गिरावट
14-Jul-2026 01:48 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल के मुकाबले वर्तमान खरीफ सीजन में 10 जुलाई 2026 तक मोटे अनाजों का सकल उत्पादन क्षेत्र 127.30 लाख हेक्टेयर से 28.61 लाख हेक्टेयर या 22.47 प्रतिशत लुढ़ककर 98.69 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल 182.63 लाख हेक्टेयर से भी बहुत पीछे है। वैसे तो सभी मोटे अनाजों की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है मगर इसमें भी खासकर मक्का एवं बाजरा के रकबे में भारी गिरावट देखी जा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के मुकाबले 2026 के खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन क्षेत्र 69.56 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 55.97 लाख हेक्टेयर, ज्वार का बिजाई क्षेत्र 9.01 लाख हेक्टेयर से गिरकर 6.88 लाख हेक्टेयर, बाजरा का क्षेत्रफल 45.98 लाख हेक्टेयर से घटकर 33.76 लाख हेक्टेयर तथा रागी का रकबा 1.11 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 93 हजार हेक्टेयर रह गया। स्मॉल मिलेट्स की बिजाई भी गत वर्ष के 1.64 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस बार 10 जुलाई तक 1.16 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सकी।
इस बार सामान्य औसत क्षेत्रफल मक्का का 80.77 लाख हेक्टेयर, बाजरा का 70.94 लाख हेक्टेयर, ज्वार का 14.44 लाख हेक्टेयर तथा रागी का 12.01 लाख हेक्टेयर आंका गया है। बिजाई की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लगता है कि मक्का और बाजरा का बिजाई क्षेत्र सामान्य औसत क्षेत्रफल से कुछ पीछे रह जाएगा। आमतौर पर कमजोर मानसून वाले वर्षों में किसान मोटे अनाजों की खेती को प्राथमिकता देते हैं
लेकिन इस बार मक्का की बिजाई में उत्पादकों का उत्साह एवं आकर्षण काफी घटने की आशंका है क्योंकि एक तो इसका थोक मंडी भाव काफी नीचे चल रहा है और दूसरे, 2026-27 सीजन के लिए इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में महज 10 रुपए प्रति क्विंटल की मामूली बढ़ोत्तरी की गई है जिससे किसान निराश और नाखुश हैं।
