सरकारी खरीद एवं औद्योगिक मांग से कपास का भाव होने लगा मजबूत

20-Jan-2025 06:13 PM

मुम्बई । लम्बे समय तक सुस्त रहने के बाद कपास के बाजार में अब हलचल तथा तेजी-मजबूती देखी जा रही है। एक तरफ सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की अच्छी खरीद की जा रही है तो दूसरी ओर इसकी औद्योगिक एवं निर्यात मांग भी मजबूती होने लगी है।

प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में कपास का दाम सुधरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिल रही है। 

उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य मीडियम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7121 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशे वाली किस्मों के लिए 7521 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। कई मंडियों में कपास का दाम इससे ऊपर पहुंच गया है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार पिछले साल की तुलना में 2024-25 सीजन के दौरान बिजाई क्षेत्र में भारी कमी आने तथा कुछ इलाकों में बाढ़-वर्षा से फसल को नुकसान होने से कपास का उत्पादन काफी घटने की संभावना है और मंडियों में इसकी आवक भी अपेक्षाकृत कम हो रही है।

सरकारी एजेंसी की सक्रियता बनी हुई है। जिनिंग-प्रेसिंग इकाइयों द्वारा अच्छी मात्रा में कपास की खरीद की जा रही है। आगामी समय में भी कपास का भाव मजबूत रहने की उम्मीद है।

तेलंगाना और महाराष्ट्र में विशाल सरकारी खरीद होने से कीमतों को ठोस सहारा मिल रहा है। समझा जाता है कि जल्दी ही बांग्ला देश, चीन तथा वियतनाम जैसे देशों में भारतीय कपास की अच्छी मांग निकल सकती है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर कपास का उत्पादन 2023-24 सीजन के 325.22 लाख गांठ से करीब 26 लाख गांठ घटकर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 299.26 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर अटकने का अनुमान लगाया है

राजस्थान में कपास का औसत मंडी भाव 7212 रुपए प्रति क्विंटल तथा उच्चतम मूल्य 7585 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। महाराष्ट्र में भी कपास का दाम कमोबेश इसी स्तर पर चल रहा है।