साप्ताहिक समीक्षा- जीरा

01-Aug-2026 08:45 PM

निर्यात व्यापार कम होने के कारण जीरे में अधिक मन्दा-तेजी नहीं

नई दिल्ली। विगत कुछ समय से जीरे में निर्यात व्यापार कम होने के कारण जीरे के दाम 3/5 रुपए प्रति किलो मन्दा-तेजी के बीच ही चल रहे हैं। यही हाल-फिलहाल अधिक तेजी की संभावना भी नहीं है लेकिन भाव न्यूनतम स्तर पर होने के कारण वर्तमान भावों में मंदा भी नहीं है। जानकारों का कहना है कि इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन अधिक होने के कारण भारतीय जीरे का निर्यात प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में चीन, टर्की, सीरिया में नए मालों की आवक होने के कारण अभी हाल-फिलहाल निर्यात मांग बढ़ने की संभावना भी नहीं है। लेकिन सितम्बर माह में भाव बढ़ने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि चालू सीजन के दौरान किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण आगामी सीजन के लिए उत्पादक केन्द्रों पर जीरा बिजाई प्रभावित होने की संभावना है। जोकि भविष्य में तेजी का कारण बनेगा। चालू सीजन के दौरान धनिया की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी आने के कारण गुजरात, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में धनिया की बिजाई अधिक क्षेत्रफल पर किए जाने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे है। 
उल्लेखनीय है कि चालू सीजन के दौरान भी देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा था। मगर बकाया स्टॉक अधिक होने के कारण कुल उपलब्धता अच्छी बनी रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू सीजन के दौरान गुजरात में जीरा उत्पादन 32/34 लाख बोरी का रहा जबकि गत वर्ष उत्पादन अनुमान 44/45 लाख बोरी के लगाए गए थे। राजस्थान में उत्पादन बढ़ा है और इस वर्ष राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष के 50/52 लाख बोरी के मुकाबले 55/56 लाख बोरी माना गया है। 
आवक 
कुल उत्पादन का अधिकांश माल मंडियों में आ जाने के कारण मंडियों में दैनिक आवक घट गई है। प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक घटकर 8/9 हजार बोरी की रह गई है। जबकि राजकोट में आवक 800/900 बोरी की रह गई है। राजस्थान की जोधपुर मंडी में आवक 1000/1200 बोरी एवं मेडता में आवक 2000/2500 बोरी की चल रही है। नागौर में आवक 1000/1500 बोरी एवं नौखा 300/400 बोरी की हो रही है। सूत्रों का कहना है कि कुल उत्पादन का लगग 80/85 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है। अब किसानों के पास 15/20 प्रतिशत का माल बकाया है जोकि धीरे-धीरे मंडियों में आ आएगा। 
मन्दा-तेजी 
जानकारों का कहना है कि हाल-फिलहाल जीरा कीमतों में अधिक मन्दा-तेजी के आसार नहीं है। हालांकि मंडियों में आवक कमजोर चल रही है। लेकिन निर्यात एवं लोकल व्यापार भी सीमित हो रहा है। वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर एवरेज क्वालिटी जीरे के भाव 185/210 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में 3/5 रुपए प्रति किलो का मंदा-तेजी चलता रहेगा। लेकिन सितम्बर-अक्टूबर माह में भावों में तेजी के अनुमान लगाए जा रहे हैं। क्योंकि एक ओर जहां अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीन, टर्की आदि देशों की सप्लाई प्रभावित हो जाएगी। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जीरे की बिजाई भी घटने के समाचार मिलने शुरू हो जाएंगे। उल्लेखनीय है कि जीरे की बिजाई अक्टूबर माह में शुरू होती है और नई फसल की आवक जनवरी-फरवरी में आती है। 
निर्यात घटा
वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान जीरा निर्यात 14 प्रतिशत घटने के पश्चात वर्ष 2026-27 के प्रथम दो माह में भी जीरा निर्यात 21 प्रतिशत घटा है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई- 2026 के दौरान जीरा का निर्यात 35656 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 831 करोड़ की रही। जबकि गत वर्ष अप्रैल-मई- 2025 के दौरान जीरा का निर्यात 45143 टन का किया गया था और निर्यात से प्राप्त आय 1086.31 करोड़ की रही। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरे का कुल निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही।