सुपर अल नीनो के प्रकोप से अनेक देशों को गंभीर खतरा

12-Mar-2026 05:36 PM

मनीला। जब विषुवतीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य औसत की तुलना में कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस ऊंचा हो जाता है तब 'सुपर' अल नीनो के आने की आशंका बढ़ जाती है।

प्रत्येक 10 से 15 वर्षों में एक बार इसका आगमन होता है। यद्यपि चालू वर्ष के दौरान सुपर अल नीनो के आने की संभावना अभी 20-25 प्रतिशत ही है लेकिन अल नीनो (सामान्य) के आगमन की आशंका बहुत बढ़ गई है। 

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो के प्रकोप से संसार के अनेक देशों पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसमें ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण एशिया से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया तक का विशाल भूभाग शामिल है।

अल नीनो की वजह से आसियान देशों में बारिश कम होने तथा तापमान काफी बढ़ने की आशंका है जिससे खासकर पामतेल, नारियल तेल, चावल एवं बागानी फसलों का उत्पादन घट सकता  है।

भारतीय उप महाद्वीप के देश भी इस मौसम चक्र से प्रभावित होंगे उधर दक्षिण अमरीका महाद्वीप में जोरदार वर्षा होने तथा भयंकर बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाएगी।