सीजन 2024-25: महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 47.50 लाख टन तक पहुंचा

22-Jan-2025 07:13 PM

महाराष्ट्र में चल रहे 2024-25 सीजन के दौरान चीनी उत्पादन 47.50 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले सीजन की इसी अवधि में हुए 57.61 लाख टन के उत्पादन से कम है। वर्तमान में राज्य में 196 चीनी मिलें गन्ना पेराई कार्य में लगी हुई हैं, जो पिछले सीजन की तुलना में 10 कम हैं।

21 जनवरी तक राज्यभर में मिलों ने 533.31 लाख टन गन्ने की पेराई की, जबकि पिछले सीजन में इस अवधि तक 613.57 लाख टन गन्ने की पेराई हुई थी।

राज्य का औसत चीनी रिकवरी दर 8.91% दर्ज किया गया है, जो पिछले सीजन के 9.39% से कम है।

यह जानकारी चीनी आयुक्तालय की रिपोर्ट में दी गई है।  

चीनी उत्पादन में गिरावट के पीछे पेराई सीजन की देरी, चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ना और गन्ने की पैदावार में कमी जैसे कारण जिम्मेदार हैं।  

क्षेत्रीय उत्पादन विवरण:

1. पुणे मंडल:

- गन्ना पेराई: 127.66 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 114.58 लाख क्विंटल

- औसत रिकवरी दर: 8.98%

- मिलें: 31 (18 सहकारी, 13 निजी)

2. कोल्हापुर मंडल:

- गन्ना पेराई: 129.72 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 136.73 लाख क्विंटल

- औसत रिकवरी दर: 10.54%** (राज्य में सबसे अधिक)

- मिलें: 40 (26 सहकारी, 14 निजी)  

3. सोलापुर मंडल:

- गन्ना पेराई: 92.16 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 71.09 लाख क्विंटल

- औसत रिकवरी दर: 7.71%

- मिलें: 43 (17 सहकारी, 26 निजी)

4. अहमदनगर मंडल:

- गन्ना पेराई: 68.12 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 56.43 लाख क्विंटल

- औसत रिकवरी दर: 8.28%

- मिलें: 26 (14 सहकारी, 12 निजी)

5. नांदेड मंडल:

- गन्ना पेराई: 60.51 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 55.01 लाख क्विंटल

- औसत रिकवरी दर: 9.09%

- मिलें: 29 (9 सहकारी, 20 निजी)

6. छत्रपति संभाजीनगर मंडल:

- गन्ना पेराई: 47.9 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 35.47 लाख क्विंटल

- मिलें: 20 (12 सहकारी, 8 निजी)

7. अमरावती मंडल:

- गन्ना पेराई: 5.85 लाख टन

- चीनी उत्पादन: 4.97 लाख क्विंटल

- मिलें: 4 (1 सहकारी, 3 निजी)

8. नागपुर मंडल:

- 3 चीनी मिलों ने गन्ना पेराई कार्य शुरू कर दिया है।

निष्कर्ष:

महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन में इस सीजन कमी दर्ज की गई है। पेराई की शुरुआत में देरी, इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का उपयोग, और गन्ने की कम उपज इसके मुख्य कारण हैं। हालाँकि, कोल्हापुर मंडल ने उच्चतम चीनी रिकवरी दर दर्ज की है। सरकार और चीनी मिलों के लिए इन चुनौतियों का समाधान निकालना अत्यंत आवश्यक है।