SAAF 2025 में तुवर पर की गयी चर्चा के मुख्य अंश
22-Jan-2025 11:12 AM
SAAF 2025 में तुवर पर की गयी चर्चा के मुख्य अंश
SAAF 2025- तुवर पैनल
मॉडरेटर
मनीषा गुप्ता, CNBC TV18, इंडिया
पैनल मेम्बर
रोहित पोपटानी, कृष्णा केवासर्स, इंडिया
हितेन कटारिया, सुन्राज शिपिंग एजेंसी, इंडिया
श्याम नर्सरिया, आरवी इंटरनेशनल, म्यांमार
राहुल अग्रवाल, शिव शक्ति ग्रुप, नेपाल
भारत
★ 2024-25 में तुवर उत्पादन 38 लाख टन, 2023-24 में 29-30 लाख टन रहा।
★ चालू सीजन में एरिया बढ़ा, मौसम ने दिया साथ। 11 लाख टन आयात के बाद 49.2 लाख टन उपलब्धता। 40 लाख टन खपत के बाद सीजन के अंत में 9 लाख टन तुवर का स्टॉक बचने की उम्मीद जो गत वर्ष 2 लाख टन था।
★ गत वर्ष 8 लाख टन आयात के बाद 42.4 लाख टन तुवर उपलब्धता बनी थी। अप्रैल से दिसंबर तक 10.9 लाख टन तुवर आयात भारत में किया गया जो 2023-24 में 6.27, 2022-23 में 6.34, 2021-22 में 5.92 लाख टन था।
★ वित्त वर्ष 2024-25 में 7.71, 2022-23 में 21.92, 2021-22 में 8.94 लाख टन हुआ था आयात।
★ किसी भी फसल का उत्पादन भावों में आये बदलाव से हमेशा प्रभावित होता है।
★ जून 2024 में मुंबई/चेन्नई तुवर लेमन 11,300 रुपए, गुलबर्गा तुवर 12,000 रुपए, लातूर तुवर 11,975 रुपए, कटनी तुवर 12,400 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी थी जो अब MSP 7,750 रुपए प्रति के नीचे आ चुकी है। मुंबई/चेन्नई तुवर लेमन 10 जनवरी को 6950 रुपए, गुलबर्गा तुवर 8000, लातूर तुवर 7750, कटनी तुवर 8300 रुपए प्रति क्विंटल पर बिकी थी।
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म्यांमार
★ जनवरी से दिसम्बर तक म्यांमार से तुवर का निर्यात 3.13 लाख टन पहुंचा।
★ बर्मा में 2025 में तुवर उत्पादन 3.75, 2024 में 3, 2023 में 2.6, 2022 में 2.2, 2021 में 1 लाख टन हुआ था। भारत की बढ़ती डिमांड से लगातार उत्पादन में हुई वृद्धि।
★ 2021 में 1.6, 2022 में 2, 2023 में 2.6, 2024 में 3.15, 2025 में 3.5 लाख टन का निर्यात होने की उम्मीद।
★ अक्टूबर 2023 में बर्मा लेमन 1450$/टन पहुंची थी जो 01.01.2024 को घटकर 1055$/टन पर आई। परन्तु उसके बाद कीमतों में देखा गया उछाल। जून 2024 तक बर्मा उड़द 1465$/टन के उच्चतम भाव पर पहुंची। और इसके बाद कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गयी।
★ 10.01.2025 को बर्मा तुवर 815$/टन पर आई जिसक सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा और कीमतों में देखी गयी जबरदस्त गिरावट।
★ कुल मिलाकर सीजन भर तुवर उपलब्धता बनी रहने के आसार, साथ ही पीली मटर का आयात भी जारी। पीली मटर के कारण तुवर की खपत पर पड़ा असर।
