'सी' के बजट पूर्व ज्ञापन में तिलहन का उत्पादन बढ़ाने तथा खाद्य तेल का आयात घटाने पर जोर

21-Jan-2025 08:20 PM

मुम्बई । स्वदेशी तिलहन तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र की एक अग्रणी संस्था- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्रीय वित्त वाणिज्य, खाद्य उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक  वितरण, कृषि एवं किसान कल्याण तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग जैसे मंत्रालयों के पास प्रेषित अपने बजट पूर्व ज्ञापन में अनेक सुझाव दिए हैं।

इसमें खासकर तिलहन तेल क्षेत्र को मजबूत बनाने पर सरकार को अधिक से अधिक ध्यान देने की सलाह दी गई है। इसके तहत घरेलू प्रभाग में विभिन्न तिलहन फसलों की औसत उपज दर तथा कुल पैदावार बढ़ाने, विदेशों से खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने तथा तिलहन-तेल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने हेतु हर संभव कदम उठाने पर विशेष जोर दिया गया है। 

'सी' के ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले तीन दशकों के दौरान खाद्य तेल-तिलहन क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव आया है। नब्बे के दशक में खाद्य तेलों के आयात पर भारत निर्भरता केवल 3 प्रतिशत थी जो अब उछलकर 60 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है।

इस निराशाजनक परिदृश्य का मुख्य कारण यह है कि एक तरफ तिलहन-तेल का घरेलू उत्पादन एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना रहा जबकि इसकी मांग एवं खपत में नियमित रूप से बढ़ोतरी होती रही।

तिलहनों का उत्पादन 350 लाख टन के आसपास तथा इसकी औसत उपज दर 900-1000 किलो प्रति हेक्टेयर के आसपास स्थिर है। 

ज्ञापन के अनुसार वर्तमान समय में देश के अंदर 1.40 लाख करोड़ रुपए मूल्य के करीब 160 लाख टन खाद्य तेलों का वार्षिक आयात हो रहा है।

इसे देखते हुए 'नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल' को गम्भीरतापूर्वक लागू किए जाने की सख्त जरूरत है और अगले पांच वर्षों के लिये इस योजना के मद में 25,000 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की जानी चाहिए ताकि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता को 60 प्रतिशत के वर्तमान स्तर से घटाकर 2029-30 तक 25-30 प्रतिशत के स्तर पर लाया जा सके।

एसोसिएशन का कहना है कि रिफाइंड श्रेणी के खाद्य तेल के आयात पर अंकुश लगना चाहिए तथा ऑयल मील के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।