रणनीतिक प्रयासों से हल्दी का उत्पादन एवं निर्यात बढ़ाना संभव
16-Jan-2025 03:46 PM
नई दिल्ली । यद्यपि भारत को हल्दी के निर्यात में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन रणनीतिक एवं व्यावहारिक प्रयासों के सहारे उसे दूर किया जा सकता है। देश में हल्दी का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उसकी क्वालिटी को बेहतर और कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
कई बार गुणवत्ता के आधार पर आयातक देश भारतीय हल्दी की खेपों को अस्वीकार कर देते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसका भाव घटता-बढ़ता रहता है जिससे घरेलू बाजार मूल्य में भी उतार-चढ़ाव आ जाता है और उत्पादकों को उचित दाम नहीं मिलने पर हल्दी की खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण घट जाता है।
हल्दी के कुल वैश्विक उत्पादन में भारत की भागीदारी 75 प्रतिशत से ज्यादा तथा कुल अंतर्राष्ट्रीय निर्यात में हिस्सेदारी 62 प्रतिशत के करीब रहती है।
एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि हल्दी के उत्पादन में बढ़ोत्तरी का सिलसिला जारी रखने तथा वर्ष 2030 तक देश से इसका सालाना निर्यात बढ़ाकर 1 अरब डॉलर पर पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार को लक्ष्यांकित तरीके से हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।
भारत दुनिया में हल्दी का सबसे प्रमुख उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक देश बना हुआ है और फिलहाल इसकी सर्वोच्च पोजीशन के लिए कोई खतरा भी नहीं है लेकिन हल्दी का निर्यात बाजार जिस तेजी से फैल रहा है उसे देखते हुए भारत को इस सुनहरे अवसर का भरपूर फायदा उठाने का हर संभव प्रयास अवश्य करना चाहिए।
यदि पैदावार एवं क्वालिटी में अपेक्षित सुधार आ जाए तो हल्दी के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है। वर्तमान हालत यह है कि देश में 10-11 लाख टन हल्दी का वार्षिक उत्पादन होता है जबकि इसका निर्यात 2 लाख टन से भी काफी कम रहता है। हल्दी में करक्युमिन का अपेक्षित अंश मौजूद रहना आवश्यक है क्योंकि यह अच्छी क्वालिटी का प्रतीक माना जाता है।
पिछले तीन साल से हल्दी के उत्पादन क्षेत्र में गिरावट का रुख देखा जा रहा है जिसके लिए अनेक कारक जिम्मेदार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश से केवल 10 प्रतिशत ऐसी हल्दी का निर्यात हो रहा है जिसमें करक्युमिन का अंश आयातकों की उम्मीद एवं जरूरत के अनुरूप मौजूद रहता है।
आमतौर पर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 5 प्रतिशत या इससे अधिक करक्युमिन अंश वाली हल्दी को पसंद किया जाता है जबकि भारत की अधिकांश हल्दी में इसका अंश 2-3 प्रतिशत के आसपास ही रहता है।
