रुई का शुल्क मुक्त आयात बंद होने से वस्त्र उद्योग चिन्तित

02-Jan-2026 01:54 PM

मुंबई। रुई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गयी और इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार के ओर से अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गयी है। इसका मतलब यह हुआ कि रुई के आयात पर पुनः 11 प्रतिशत का सीमा शुल्क प्रभावी हो गया है। शुल्क मुक्त आयात बंद होने से घरेलू प्रभाग में रुई का भाव कुछ तेज होने की सम्भावना है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2025 में रुई के आयात को शुल्क मुक्त इया गया था जिससे कॉटन टैक्सटाइल मिलों को काफी राहत मिल रही थी।

भारतीय वस्त्र उत्पादों के प्रमुख खरीदार - अमरीका में अगस्त के अंतिम सप्ताह से ही इसके आयात पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा हुआ है। इससे निर्यातकों को अब वहां अपने उत्पादों के दाम को प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में भारी कठिनाई होगी। तमिलनाडु स्पिनिंग मिल्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले सीजन की तुलना में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान रुई की आवक में कम से कम 60 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) की कमी आई है और कपास का घरेलू उत्पादन भी 300 लाख गांठ से कम होने की सम्भावना है।

वस्त्र उद्योग के तमाम संगठन केंद्र सरकार से रुई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा कम से कम मार्च 2026 तक बढ़ाने की मांग कर रहे थे लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। सादर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (सीमा) के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि रुई के शुल्क मुक्त आयात का समय अब समाप्त हो गया है। इससे वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता प्रभावित होगी और उद्योग एवं शिपर्स के मार्जिन में कमी आएगी। अमरीका में इसके निर्यात पर असर पड़ सकता है।