पश्चिम एशिया के संकट का असर

14-Mar-2026 10:53 AM

पश्चिम एशिया में भयंकर अशांति का माहौल बना हुआ है। ईरान का इजरायल एवं अमरीका का युद्ध पन्द्रहवें दिन में प्रवेश कर गया है और निकट भविष्य में इसके समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।

ईरान-अमरीका युद्ध का असर सम्पूर्ण खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है और खासकर ऊर्जा संकट बढ़ता जा रहा है। तेल टैंकर्स पर लगातार हमले हो रहे हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, ओमान, कुवैत, इराक, जॉर्डन एवं बहरीन जैसे देशों के तेल (पेट्रोलियम) उत्पादक केन्द्रों को ईरान निशाना बना रहा है।

इसके अलावा उसने होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरू मध्य) का रास्ता भी बंद कर दिया है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को बर्बाद करने की चेतावनी भी जारी कर दी है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के 20 प्रतिशत खनिज तेल का आयात-निर्यात होता है।

अनेक अन्य देशों की भांति भारत पर भी पश्चिम एशिया के संकट का गहरा प्रतिकूल असर पड़ रहा है। भारत से खाड़ी क्षेत्र के देशों को बासमती चावल, फल-सब्जी, चीनी, मसालों एवं ऑयल मील आदि का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है जबकि वहां से भी भारत में कई चीजें मंगाई जाती हैं।

लेकिन सामुद्रिक परिवहन में गतिरोध उत्पन्न होने से आयात- निर्यात बुरी तरह बाधित हो रहा है। भारत से इन देशों को करीब 45 प्रतिशत बासमती चावल का निर्यात किया जाता है जिसमें फिलहाल ठहराव आ गया है।

अनेक भारतीय जहाज बीच रास्ते से ही वापस लौट गए हैं। यह संकट जल्दी से जल्दी खत्म होना जरुरी है अन्यथा वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ जाएगी।