प्रतिबंधों-नियंत्रणों के बावजूद वर्ष 2024 में भारतीय चावल का निर्यात रहा स्थिर

22-Jan-2025 08:15 PM

नई दिल्ली । हालांकि वर्ष 2024 में अधिकांश समय तक गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रहा और सेला चावल पर 10-20 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू रहा जबकि बासमती चावल के लिए 950 डॉलर प्रति टन का न्यूतनम निर्यात मूल्य (मेप) भी नियत किया किया गया लेकिन इन तमाम बाधाओं के बावजूद कुल मिलाकर भारतीय चावल का निर्यात प्रदर्शन संतोषजनक रहा। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यद्यपि गैर बासमती (सामान्य) चावल के निर्यात में गिरावट आई लेकिन ऊंचे मूल्य वाले प्रीमियम क्वालिटी के बासमती चावल का शानदार शिपमेंट होने से वर्ष 2024 में भारतीय चावल का कुल निर्यात 178 लाख टन पर पहुंच गया जो वर्ष 2023 के शिपमेंट से कुछ ही कम था।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब तथा इराक जैसे देशों की मजबूत मांग के सहारे बासमती चावल के निर्यात में 16.3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इससे वैश्विक बाजार में चावल का दाम घटाने में सहायता मिली।

सितम्बर 2024 में नियंत्रणों-प्रतिबंधों को हटाए जाने के बाद अक्टूबर-दिसम्बर की तिमाही के दौरान भारत से चावल के निर्यात की गति काफी तेज हो गई जिससे वर्ष की पहली छमाही के दौरान शिपमेंट में आई गिरावट की काफी हद तक भरपाई हो गई।

चूंकि अब भारतीय चावल पूरी तरह स्वतंत्र हो गया है इसलिए वर्ष 2025 में इसका निर्यात प्रदर्शन शानदार रहने के आसार हैं।

एशिया तथा अफ्रीका के तमाम परम्परागत आयातक देश अब भारत से निश्चिंत होकर चावल की खरीद का अनुबंध कर रहे हैं। वर्ष 2023 में देश से 178.60 लाख टन चावल का निर्यात हुआ था।