प्रतिबंध-नियंत्रण हटने के बाद चावल के निर्यात की गति बढ़ी
27-Dec-2024 12:35 PM
नई दिल्ली । केन्द्र सरकार द्वारा साबुत चावल की सभी किस्मों एवं श्रेणियों के शिपमेंट पर लगे प्रतिबंधों नियंत्रणों को समाप्त किए जाने के बाद इसके निर्यात की गति काफी तेज हो गई है।
इसके फलस्वरूप अप्रैल से नवम्बर 2024 के आठ महीनों में भारत से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 8 प्रतिशत से भी अधिक बढ़कर 14.01 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
इसमें चावल का सबसे अधिक योगदान रहा। इन आठ महीनों में नवम्बर का निर्यात उछलकर 7.31 अरब डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले साल की इसी अवधि के निर्यात 6.44 अरब डॉलर से करीब 13 प्रतिशत अधिक रहा।
उल्लेखनीय है कि सितम्बर 2024 में सरकार ने गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात की स्वीकृति प्रदान की और फिर सेला चावल पर लगे 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क को समाप्त कर दिया।
इसके अलावा बासमती चावल के लिए लागू 950 डॉलर प्रति टन तथा सफेद चावल के लिए लगाए गए 490 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य को भी हटा दिया गया।
इसके फलस्वरूप भारतीय चावल पुनः अन्तर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धी स्तर पर पहुंच गया और एशिया तथा अफ्रीका के विभिन्न आयातक देशों की दिलचस्पी इसकी खरीद में तेजी से बढ़ने लगी।
वैश्विक बाजार में जबरदस्त मांग को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय चावल के निर्यात में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत से 10.41 अरब डॉलर मूल्य के चावल का निर्यात हुआ था जो 2022-23 से 6.5 प्रतिशत कम था। इस बार 50 लाख टन बासमती चावल का निर्यात लक्ष्य रखा गया है और इसके हासिल होने की पक्की उम्मीद भी है।
पाकिस्तान से 10 लाख टन से भी कम बासमती चावल का निर्यात होता है। ईरान के साथ कुछ समस्या होने के बावजूद बासमती चावल का निर्यात प्रदर्शन बेहतर चल रहा है।
