प्रचंड गर्मी से जायद फसलों पर खतरा बरकरार
20-May-2024 05:39 PM
नई दिल्ली । फरवरी-मार्च में मौसम की हालत अनुकूल रहने से ग्रीष्मकालीन या जायद फसलों की बिजाई में ज्यादा समस्या नहीं आई लेकिन मार्च-अप्रैल में मानसून पूर्व की वर्षा का अभाव होने तथा मई में प्रचंड गर्मी पड़ने से फसलों की प्रगति प्रभावित हो रही है।
ध्यान देने की बात है कि ग्रीष्मकालीन फसलों की कटाई-तैयारी का समय शुरू हो चुका है और अगैती फसलों की कटाई हो रही है मगर पिछैती बिजाई वाली फसलों की औसत उपज दर में गिरावट आने की संभावना है।
विशेष बात यह है कि मानसून-पूर्व की बारिश कम होने के साथ-साथ बांधों-जलाशयों में भी पड़नी का स्तर काफी घट गया और अनेक जलाशय तो पूरी तरह सूख गए।
भूमि जल एवं भूमिगत जल का भी अभाव रहा जिससे फसलों की सही समय पर अच्छी सिंचाई नहीं हो सकी और जहां कृत्रिम साधकों से किसी तरह सिंचाई का प्रबंध किया गया वहां लागत खर्च में भारी बढ़ोत्तरी हो गई।
दक्षिणी राज्यों एवं पूर्वी भारत में बांधों-जलाशयों में पानी का भंडार घटकर चिंता जनक स्तर तक नीचे आ गया है। समझा जाता है कि मानसून सीजन में अच्छी वर्षा होने पर ही इसमें सुधार हो सकेगा।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र तथा बंगाल जैसे राज्यों में अब मानसून पूर्व की अच्छी बारिश हो रही है मगर प्रचंड गर्मी के कारण पहले ही जायद फसलों को जो नुकसान हो चुका है उसकी भरपाई होना कठिन है।
जायद सीजन में धान के अलावा उड़द, मूंग, तिल, मूंगफली, मक्का एवं बाजरा जैसी फसलों की अच्छी खेती होती है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुल मिलाकर जायद फसलों का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल से कुछ अधिक रहा और लगभग सभी प्रमुख फसलों के रकबे में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई
लेकिन अत्यन्त ऊंचे तापमान एवं सिंचाई के अभाव में उत्पादन उसके अनुरूप होने में संदेह है। फिर भी बाजार में आपूर्ति कुछ समय के लिए बढ़ सकती है।
