पाम तेल, सोया तेल एवं तिलहनों में वायदा कारोबार पर लगी रोक को हटाने का आग्रह

28-May-2024 08:45 PM

मुम्बई । देश के एक अग्रणी व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने तिलहन-तेल में वायदा कारोबार पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग करते हुए कहा है कि 4 जून के बाद जब केन्द्र में नई सरकार का गठन होगा तब सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) को दो मांगों पर विशेष जोर देना चाहिए।

पहली मांग पाम तेल, सोयाबीन तेल तथा तिलहनों में वायदा कारोबार को दोबारा आरंभ करने की होनी चाहिए जबकि दूसरी मांग खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोत्तरी की होनी चाहिए जो लम्बे समय से काफी निचले स्तर पर निर्धारित है।

सीईओ के अनुसार तिलहन-तेल में वायदा कारोबार पर रोक लगाना दुर्भाग्य पूर्ण था। सरकार ने इसकी समय सीमा दिसम्बर 2024 तक बढ़ा दी है। सूरजमुखी तेल में वायदा कारोबार अभी जाती है।

जून अनुबंध के लिए इसका वायदा भाव 870-875 रुपए प्रति 10 किलो चल रहा है जो मई डिलीवरी के लिए प्रचलित वायदा मूल्य 865-870 रुपए प्रति 10 किलो से कुछ ऊंचा है। जून अनुबंध के लिए वायदा मूल्य में आगे गिरावट आने की संभावना कम है।

870 रुपए का भाव नीचे स्तर का है। जुलाई-अगस्त की डिलीवरी के लिए सूरजमुखी तेल का वायदा भाव सुधरकर 890-900 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंच सकता है। 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा पहले भी सरकार से बार-बार पाम तेल एवं सोया तेल में वायदा कारोबार पर लगे प्रतिबंध  का आग्रह किया जाता रहा है।

जब खाद्य तेलों का घरेलू बाजार भाव नरम पड़ा था तब इस प्रतिबंध के हटने की उम्मीद जगी थी। अब भी खाद्य तेलों में ज्यादा तेजी नहीं है। नई सरकार से इसके लिए जोरदार आग्रह किया जाएगा।

सोयाबीन का भाव काफी घट गया है। यदि नई बिजाई शुरू होने से पूर्व वायदा प्रतिबंध को समाप्त कर दिया गया तो क्षेत्रफल बढ़ाने में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बढ़ जाएगा। 

पिछले महीने अर्जेन्टीना में सोया प्रोसेसिंग प्लांटों में श्रमिकों ने हड़ताल कर दी थी। ब्राजील तथा अर्जेन्टीना में भारी बारिश से सोयाबीन की क्रशिंग-प्रोसेसिंग की गति धीमी पड़ गई है। इससे भारत को सोयाबीन डीओसी का निर्यात बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।