News Capsule/न्यूज कैप्सूल: उत्पादन बढ़ने के बावजूद महाराष्ट्र का चीनी उद्योग दबाव में

30-Mar-2026 12:20 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: उत्पादन बढ़ने के बावजूद महाराष्ट्र का चीनी उद्योग दबाव में
★ महाराष्ट्र में इस सीजन चीनी उत्पादन बढ़ने के बावजूद उद्योग कई चुनौतियों से जूझ रहा है। मिलों का संचालन इस बार सामान्य 160 दिनों के बजाय करीब 100 दिन में ही समाप्त हो गया, जिससे क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाया।
★ उद्योग पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में वेस्ट एशिया तनाव से निर्यात प्रभावित होना और नवंबर–दिसंबर की असमय बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान शामिल है, जिसके चलते मिलों को जल्दी बंद करना पड़ा।
★ राज्य के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 सीजन में 1042.88 लाख टन गन्ना पेराई से 98.8 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष से अधिक है, लेकिन 2023-24 के 110 लाख टन से कम है।
★ उद्योग ने सरकार से ₹500 प्रति टन सब्सिडी, ₹8,000 करोड़ के कर्ज पुनर्गठन, और एथेनॉल कोटा 30% से बढ़ाने की मांग की है। एथेनॉल क्षमता 424 करोड़ लीटर होने के बावजूद केवल 116 करोड़ लीटर का आवंटन हुआ है, जिससे उपयोग लगभग 27% ही है।
★ कीमतों को लेकर भी दबाव है। गन्ने का FRP 2018-19 के ₹2,750 से बढ़कर 2025-26 में ₹3,550 प्रति टन हो गया है, जबकि चीनी का MSP ₹31 प्रति किलो पर स्थिर है। उद्योग इसे बढ़ाकर ₹41 प्रति किलो करने की मांग कर रहा है।
★ मिलों के जल्दी बंद होने से करीब ₹3,300 करोड़ का नुकसान हुआ है, जबकि किसानों के ₹4,315 करोड़ के भुगतान अभी लंबित हैं।