News Capsule/न्यूज कैप्सूल: देसी चना आयात पर व्यापारिक संगठनों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग

13-Mar-2026 05:46 PM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: देसी चना आयात पर व्यापारिक संगठनों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग

★ देश में देसी चना आयात से जुड़े एक मुद्दे को लेकर व्यापारिक संगठनों ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। पिछले लगभग डेढ़ महीने में आयातकों को ★ कस्टम विभाग की ओर से पत्र/नोटिस भेजे गए, जिनमें देसी चना के आयात पर 70 प्रतिशत आयात शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है।

★ सूत्रों के अनुसार नोटिस में उल्लेख किया गया है कि देसी चना का आयात गलत एचएस (HS) कोड के तहत किया गया है। विभाग का कहना है कि एक सर्कुलर के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है और इसी संदर्भ में आयातकों को शुल्क जमा करने के लिए कहा गया है।

★ इस विषय को लेकर दाल और कृषि जिंसों से जुड़े विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने सरकार से मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। BSAF, IPGA, AFTA और CAIT के सदस्यों ने सरकार से इस मुद्दे में हस्तक्षेप कर स्पष्टता लाने की मांग की है।

★ सूत्रों के मुताबिक इस मामले को उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव और वित्त मंत्रालय के समक्ष भी रखा गया है। इसके अलावा Pulses & Beans Association, CAIT और BSAF से जुड़े सदस्य प्रदीप जिंदल तथा AFTA के सुनील बलदेव ने दिल्ली के सांसद प्रवीण खंडेलवाल को भी इस विषय की जानकारी देते हुए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है।

★ बताया जा रहा है कि सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया है कि इस विषय को जल्द ही संबंधित मंत्रालयों के समक्ष उठाया जाएगा और आवश्यक सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे।

~~~~~~~~

आखिर क्या था नोटिफिकेशन में

★ नोटिस में कहा गया है कि आयातक ने ऑस्ट्रेलिया से आयातित Whole Chick Peas (देसी चना) को CTH 07132020 के तहत घोषित कर कई Bills of Entry दाखिल किए और इस आधार पर कस्टम ड्यूटी में छूट का लाभ लिया।

★ जांच में पाया गया कि आयातित माल “Bengal gram (देसी चना)” की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए इसे CTH 07132090 (Other) के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए। संबंधित नोटिफिकेशन में दी गई शून्य बेसिक कस्टम ड्यूटी की छूट केवल बंगाल ग्राम (देसी चना) पर ही लागू होती है, सभी प्रकार के चने पर नहीं।

★ सही वर्गीकरण के अनुसार इन आयातों पर BCD 10%, AIDC 50%, SWS 10% और IGST लागू होता है।

★ गलत वर्गीकरण के कारण सरकार को कस्टम ड्यूटी का कम भुगतान हुआ है।

★ व्यापारी वर्ग का मानना है कि कस्टम विभाग का पहलू ठीक नहीं।