News Capsule/न्यूज कैप्सूल: एल नीनो से तिलहन उत्पादन पर संकट, खाद्य तेल आयात और बढ़ने की आशंका
22-Jul-2026 11:34 AM
News Capsule/न्यूज कैप्सूल: एल नीनो से तिलहन उत्पादन पर संकट, खाद्य तेल आयात और बढ़ने की आशंका
★ देश में जारी एल नीनो प्रभाव के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रभावित हो रहा है, जिससे वर्षा की कमी, बढ़ते तापमान और वर्षा आधारित तिलहन फसलों के उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो भारत की खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता और बढ़ सकती है।
★ सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी सहित खरीफ की प्रमुख तिलहन फसलें सबसे अधिक प्रभावित मानी जा रही हैं। इन फसलों की बुवाई, फूल आने और दाना बनने की अवस्था समय पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। कमजोर बारिश के कारण कई वर्षा आधारित क्षेत्रों में बुवाई में देरी हुई है और शुरुआती अनुमान बताते हैं कि कुछ इलाकों में रकबा सामान्य से करीब 40% तक कम रहा है।
★ लंबे समय तक सूखे जैसे हालात के कारण मिट्टी में नमी घट रही है, जिससे पौधों की बढ़वार कमजोर पड़ रही है और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में अधिक तापमान रहने से फलियों और दानों का विकास भी प्रभावित हो सकता है।
★ कृषि वैज्ञानिकों ने एल नीनो वर्षों में कीट प्रकोप बढ़ने की भी चेतावनी दी है। गर्म और शुष्क मौसम माहू (Aphids) और सफेद मक्खी (Whitefly) जैसे रस चूसने वाले कीटों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है। इससे किसानों की कीटनाशकों पर लागत बढ़ने के साथ फसल की लाभप्रदता घट सकती है।
★ घरेलू तिलहन उत्पादन में कमी का सीधा असर खाद्य तेल बाजार पर पड़ेगा। भारत पहले से ही अपनी खाद्य तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में उत्पादन घटने पर खाद्य तेल आयात बढ़ सकता है, जिससे आयात बिल में वृद्धि होगी और घरेलू बाजार वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाएगा। कमजोर मानसून वाले पिछले वर्षों में भी खाद्य तेल आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है।
