नियमित आपूर्ति एवं मुनाफावसूली से उड़द का दाम नरम पड़ने की उम्मीद

28-May-2024 04:47 PM

मुम्बई । शीर्ष व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एन्ड ग्रेन्स एसोसिएशन (इपगा) ने अपने साप्ताहिक मूल्य परिदृश्य (रिपोर्ट) में उड़द की कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना व्यक्त की है क्योंकि एक तो इसकी नियमित आपूर्ति हो रही है और दूसरे, इसमें मुनाफावसूली भी देखी जा रही है।

म्यांमार से उड़द का नियमित रूप से आयात हो रहा है जबकि घरेलू प्रभाग में ग्रीष्मकालीन (जायद) फसल की आवक भी हो रही है। इससे बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने तथा कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है।

लेकिन इपगा की रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि तमिलनाडु से उड़द की सीमित आपूर्ति हो रही है और आंध्र प्रदेश के किसान पॉलिशदार उड़द का स्टॉक रोकने का प्रयास कर रहे हैं जिससे आगामी समय में इसका भाव तेज हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक यद्यपि मध्य प्रदेश एवं गुजरात में अच्छी क्वालिटी की ग्रीष्मकालीन उड़द के नए माल की आवक हो रही है मगर तमिलनाडु के लिए बिल्टी कारोबार में इसकी बिक्री महंगाई बनी हुई है। आंध्र प्रदेश में किसान नीचे दाम पर उड़द का स्टॉक बेचने के इच्छुक नहीं है। 

म्यांमार से उड़द की आपूर्ति अगले तीन-चार माह तक होने की उम्मीद है और इसके आयात पर निर्भर रहने के अलावा भारत के पास अन्य कोई विकल्प नहीं है।

नई घरेलू (खरीफ कालीन) फसल की अभी बिजाई भी शुरू नहीं हुई है और इसकी कटाई-तैयारी चार माह के बाद आरंभ होगी। इस बीच म्यांमार से आयातित माल पर ही निर्भर रहना होगा।

म्यांमार के उत्पादकों एवं निर्यातकों को भारतीय दलहन बाजार की पूरी जानकारी रहती है इसलिए के इसके आधार पर ही अपनी व्यापारिक रणनीति बनाते हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में वहां उड़द का भाव कैसा रहता है क्योंकि उसके आधार पर ही भारतीय दलहन बाजार में तेजी-मंडी का रुख बन सकता है। 

पिछले सप्ताह गुजरात के राजकोट में उड़द का भाव 200 रुपए बढ़कर 9500/9700 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया क्योंकि दाल मिलर्स की मांग मजबूत रही। आंध्र प्रदेश में भी कीमत कुछ ऊंची रही जहां किसानों एवं व्यापारियों ने स्टॉक पकड़ रखा है।