निर्यातकों के बैंक खाते में ड्यूटी ड्रॉबैक की राशि का अंतरण शुरू
06-Jun-2024 11:13 AM
नई दिल्ली । केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 5 जून 2024 से सीधे निर्यातकों के बैंक खाते में पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से ड्यूटी ड्रॉबैक (शुल्क वापसी) की राशि भेजनी शुरू कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होने वाले इस अंतरण (जमा) से उद्योग व्यापार क्षेत्र को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
निर्यातक लम्बे से से इसकी मांग कर रहे थे। निर्यातकों के बैंक खाते में ड्यूटी ड्रॉबैक की राशि का भुगतान पल्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली या पीएफएमएस) के माध्यम से स्वतः हो जाएगा और इसमें किसी तरह की बाधा उत्पन्न व्यपारिक सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में सीबीआईसी का यह एक और बेहतरीन प्रयास है।
इससे ड्यूटी ड्रॉबैक की राशि का भुगतान करने में लगने वाला समय घट जाएगा क्योंकि इसमें ड्यूटी ड्रॉबैक की राशि का भुगतान करने में लगने वाला समय घट जाएगा क्योंकि इसमें हस्तकार्य की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके साथ-साथ भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ जाएगी।
सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के खंड 75 के अंतर्गत किसी भी आयातित माल अथवा उत्पाद शुल्क लगने वाली ऐसी किसी वस्तु पर जिसका इस्तेमाल निर्यात होने वाले उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
लगने वाले सीमा शुल्क में छूट देने का प्रावधान है। इसे ही ड्यूटी ड्रॉबैक या शुल्क वापसी कहा जाता है। ड्यूटी ड्रॉबैक के लिए निर्यातकों द्वारा किए जाने वाले दावे की प्रोसेसिंग 'कस्टम्स ऑटोमैटेड सिस्टम (सीएएस) द्वारा की जाती है।
सीबीआईसी भारत में व्यवसाय करने की सुगमता (इज ऑफ ड्रइंग बिजनेस) की स्थिति सुधारने में निरन्तर बेहतरीन प्रयास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ड्यूटी ड्रॉबैक से निर्यातकों को निर्यात संवर्धन में सहयता मिलती है और यह विश्व व्यापार संगठन के नियमों- प्रावधानों के अनुकूल भी है।
