निर्यात की चुनौती एवं बढ़ते स्टॉक से चावल उद्योग पर दबाव
13-Mar-2026 04:21 PM
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में भयंकर अशांति का माहौल है। वहां अमरीका और इजरायल के साथ ईरान का जबरदस्त युद्ध जारी है जिसका असर खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व एशिया के तमाम देशों पर पड़ रहा है। इससे इस क्षेत्र में भारतीय चावल विशेषकर बासमती का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होने लगा है। समुद्री मार्ग सुरक्षित नहीं है और जहाजों का किराया-भाड़ा तथा बीमा खर्च भी बढ़ता जा रहा है। भारतीय निर्यातकों के पास चावल का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है लेकिन इसके निर्यात शिपमेंट में भारी कठिनाई हो रही है।
उपलब्ध आकड़ों के अनुसार 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय पूल में 336.67 लाख टन चावल एवं 602.54 लाख टन धान का विशाल स्टॉक मौजूद था पिछले कई वर्षों से चावल के घरेलू उत्पादन में नियमित रूप से अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है जिससे भारतीय खाद्य निगम को इसके सुरक्षित भंडारण की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण चावल के निर्यात मांग में बाधा उत्पन्न हो गयी है । इसके फलस्वरूप पश्चिम एशिया के देशों को चावल से लदे जो जहाज भेजे गये थे वे वापस भारतीय बंदरगाहों पर लौट रहे हैं। जहाज़ों के वापस लौटने से मूंदड़ा, गांधीधाम एवं मुंबई जैसे बंदरगाहों पर कंटेनरों का भारी जमावड़ा हो गया है और जगह की कमी पड़ने लगी है।
उद्योग समीक्षकों का कहना है कि वैश्विक स्थिति फ़िलहाल भारतीय चावल के निर्यात के लिए अनुकूल नहीं है और यदि कुछ सप्ताहों तक लड़ाई जारी रही तो उद्योग पर दबाव काफी बढ़ जाएगा।
