निगेटिव मार्जिन के कारण जनवरी में पाम तेल के आयात में भारी गिरावट की संभावना
18-Jan-2025 11:12 AM
मुम्बई । रिफाइनिंग मार्जिन ऋणात्मक होने के कारण जनवरी 2025 में पाम तेल उत्पादों का आयात घटकर पिछले पांच साल के निचले स्तर पर सिमट जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
दरअसल प्रतिस्पर्धी सॉफ्ट तेलों के मुकाबले पाम तेल का भाव ऊंचा रहने से भारतीय रिफाइनर्स अब क्रूड पाम तेल (सीपीओ) के बजाए क्रूड सोयाबीन तेल के आयात को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं।
संसार के सबसे प्रमुख खाद्य तेल आयातक देश- भारत में पाम तेल का आयात घटने पर मलेशिया में इसके बेंचमार्क वायदा मूल्य पर दबाव बढ़ सकता है जबकि शिकागो एक्सचेंज में सोयाबीन तेल के वायदा मूल्य में सुधार आने की संभावना रहेगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार चालू माह के शुरूआती 15 दिनों के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर केवल लगभग 1.10 लाख टन पाम तेल की खेप को क्लीयरेंस दिया गया जो औसत मैसक मात्रा से बहुत कम है।
बंदरगाहों पर विदेशों से कम आयात हो रहा है जबकि उसे क्लीयरेंस देने में कोई देरी नहीं की जा रही है। कांडला, हल्दिया एवं कृष्णापट्नम जैसे बंदरगाहों पर पाम तेल का ज्यादा आयात होता है जबकि वहां पाम तेल से लदे जहाजों के पहुंचने की जो संख्या अगले दो सप्ताहों के लिए बताई गई है वह काफी कम है।
एक अग्रणी आयातक फर्म का कहना है कि जनवरी 2025 के सम्पूर्ण माह में पाम तेल का आयात घटकर 3.70 लाख टन के आसपास सिमट सकता है जो इस माह के लिए पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा।
2023-24 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में देश के अंदर औसतन 7.50 लाख टन से अधिक पाम तेल का मासिक आयात हुआ।
जनवरी 2024 में लगभग 7.83 लाख टन पाम तेल उत्पादों का आयात हुआ था जबकि जनवरी 2025 में इसका आधे से भी कम का आयात होने की संभावना है।
भारतीय रिफाइनर्स क्रूड पाम तेल के आयात में कटौती कर रहे हैं क्योंकि इसका आयात खर्च सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल से काफी ऊंचा बैठ रहा है।
कुछ दलालों एवं शिपिंग कंपनियों का मानना है कि जनवरी 2025 में देश के अंदर पाम तेल का आयात 3.40 से 3.70 लाख टन के बीच हो सकता है।
प्रथम पखवाड़े की तुलना में दूसरे पखवाड़े के दौरान पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर पाम तेल का अधिक आयात हो सकता है मगर कुल मासिक आयात 3.70 लाख टन से ज्यादा नहीं होगा।
