मध्य प्रदेश में दाल मिलों को मंडी टैक्स से छूट देने की मांग
29-Dec-2025 11:30 AM
इंदौर। लागत खर्च में वृद्धि एवं मार्जिन में गिरावट को देखते हुए ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन ने मध्य प्रदेश सरकार से एमएसएमई में पंजीकृत दाल मिलों को खासकर प्रोसेसिंग उद्देश्य के लिए खरीदे जाने वाले दलहनों- मसूर, उड़द, मूंग एवं चना आदि पर मंडी टैक्स से छूट देने का आग्रह किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इस मंडी टैक्स से राज्य की छोटी-छोटी इकाइयों की मांग प्रदत्ता प्रभावित हो रही है।
एसोसिएशन के अनुसार प्रोसेसिंग उद्देश्य के लिए दलहनों की खरीद पर जो मंडी टैक्स वसूला जाता है उससे इनपुट खर्च में इजाफा होता है। मिलों की क्रियाशील पूंजी में सिकुड़न आती है और छोटी तथा मध्यम स्तर की दाल मिलों की प्रतिस्पर्धी क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
राज्य सरकार से एक सीधी अपील करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा है कि चूंकि दाल बनाने के लिए मध्य प्रदेश में बाहर से दलहन मंगाया जाता है और इस पर मंडी टैक्स की वूसली की जाती है। इसलिए राज्य के दाल-दलहन उद्योग का लाभांश और दायरा लगातार घटता जा रहा है।
यदि दाल मिलों का अस्तित्व बरकरार रखना है और मध्य प्रदेश में उसकी निर्बाध प्रगति सुनिश्चित करनी है तो सरकार को तत्काल निश्चित रूप से मंडी टैक्स को वापस ले लेना चाहिए।
एसोसिएशन ने खुलासा किया है कि पड़ोसी एवं प्रतिद्वंदी राज्यों में दाल-दलहन के लिए टैक्स की प्रणाली उद्योग के लिए अनुकूल रखी गई है।
इसके तहत छत्तीसगढ़ में दलहन उद्योग के मंडी टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। वहां गेहूं, ज्वार, बाजरा एवं मक्का आदि पर भी मंडी टैक्स नहीं लगता है। मध्य प्रदेश में भी वही प्रणाली लागू किए जाने की आवश्यकता है।
