मध्य जनवरी तक चीनी के उत्पादन में 13.66 प्रतिशत की भारी गिरावट

16-Jan-2025 11:35 AM

नई दिल्ली । क्रियाशील इकाइयों की संख्या कम होने तथा गन्ना की क्रशिंग मात्रा में गिरावट आने से चालू सीजन के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है जबकि आगे भी इसका सिलसिला जारी रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों की शीर्ष संख्या- नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 1 अक्टूबर 2024 से 15 जनवरी 2025 के साढ़े तीन महीनों के दौरान देश में चीनी का कुल उत्पादन घटकर 130.55 लाख टन पर सिमट गया जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के उत्पादन 151.20 लाख टन से 13.66 प्रतिशत या 20.65 लाख टन कम है। 

पिछले सीजन की तुलना में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान सभी पांच शीर्ष उत्पादक राज्यों- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात एवं तमिलनाडु में चीनी के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई।

इसके तहत चीनी का उत्पादन महाराष्ट्र में 52.80 लाख टन से लुढ़ककर 43.05 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 46.10 लाख टन से घटकर 42.85 लाख टन, कर्नाटक में 31.00 लाख टन से गिरकर 27.10 लाख टन, गुजरात में 4.70 लाख टन से फिसलकर 3.70 लाख टन तथा तमिलनाडु में 3.3 लाख टन से गिरकर 1.30 लाख टन पर अटक गया।

अन्य प्रांतों- बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना आदि में भी चीनी का उत्पादन कमजोर ही देखा जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि नवम्बर से जनवरी तक गन्ना की क्रशिंग का पीक सीजन माना जाता है जबकि फरवरी से गर्मी बढ़ने लगती है और गन्ना में सुक्रोज की मात्रा घटने से चीनी की औसत रिकवरी दर में कमी आने लगती है।

फेडरेशन ने 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन घटकर 270 लाख टन पर अटकने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 के कुल उत्पादन 319 लाख टन से 49 लाख टन या 15.36 प्रतिशत कम है।

इसके तहत चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 103.65 लाख टन से घटकर 93 लाख टन, महाराष्ट्र में 110.20 लाख टन से लुढ़ककर 86 लाख टन, कर्नाटक में 53 लाख टन से घटकर 41 लाख टन, गुजरात में 9.20 लाख टन से फिसलकर 9 लाख टन तथा तमिलनाडु में 10.75 लाख टन से गिरकर 8.50 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की है।