मौसम अनुकूल रहने पर खरीफ दलहनों का उत्पादन बढ़ने के आसार

20-May-2024 07:58 PM

नई दिल्ली । पिछले खरीफ सीजन के दौरान मानसून की बारिश कम होने तथा बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने से तुवर, उड़द एवं मूंग का उत्पादन घट गया जबकि इसका पिछला बकाया स्टॉक भी सीमित था।

उसके फलस्वरूप कीमतों में तेजी रूक गई। खरीफ कालीन उड़द एवं मूंग की बिजाई अगले महीने से शुरू होगी और सितम्बर-अक्टूबर में नए माल का आना आरंभ हो जाएगा।

चूंकि तुवर एवं उड़द का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा है इसलिए अगर मानसून की अच्छी बारिश हुई तो महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे श्रीश उत्पादक प्रांतों में किसान तुवर का क्षेत्रफल बढ़ाने का भरपूर प्रयास कर सकते हैं।

केन्द्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि वह किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) या इससे ऊंचे दाम पर तुवर की खरीद के लिए तैयार है।

आम चुनाव के कारण अभी आदर्श आचार संहिता लागू है इसलिए 2024-25 की खरीफ फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा अगली नई सरकार द्वारा जून के प्रथम सप्ताह के बाद ही की जाएगी। 

अच्छी बात यह है कि मौसम विभाग ने इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में सामान्य औसत से अधिक वर्षा होने का अनुमान लगाया है।

इसके साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा का वितरण बेहतर होने तथा किसी दो बारिश के बीच समय का अंतराल कम होने की संभावना भी व्यक्त की है।

महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के साथ-साथ आंध्र प्रदेश एवं गुजरात में भी मानसून पूर्व की अच्छी बारिश हो रही है जिससे किसानों को तुवर एवं उड़द की बिजाई जल्दी शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

मानसून भी सही समय पर पहुंचने वाला है। अफ्रीकी देशों में तुवर का स्टॉक बहुत कम बचा हुआ है और अभी इसकी बिजाई मलावी तथा मोजाम्बिक जैसे देशों में समाप्त हुई है या होने वाली है।

इसकी अगैती नई फसल अगस्त- सितम्बर में तैयार होकर मार्केट में आएगी। म्यांमार में तुवर का स्टॉक है और वहां से भारत में इसका नियमित रूप से आयात भी हो रहा है।

मोजाम्बिक से वार्षिक कोटे के तहत तुवर का आयात तो अगले सीजन में होगा लेकिन इससे ऊपर कितना आयात होता है यह देखने वाली बात होगी। अगली नई फसल के लिए शायद कोई विवाद उत्पन्न नहीं होगा।