मानसून से पूर्व की भीषण गर्मी से किसानों की बढ़ी चिंता

18-May-2026 05:09 PM

नई दिल्ली। यद्यपि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इस वर्ष केरलम में दक्षिण-पश्चिम मानसून के अपने नियत समय से 5 दिन पूर्व यानी 26 मई को ही पहुंचने की संभावना व्यक्त की है लेकिन उससे पहले 21-22 मई तक देश के विभिन्न भागों में भयंकर गर्मी पड़ने तथा तापमान काफी ऊंचा रहने का अनुमान लगाया है।

लगभग आधा हिंदुस्तान इस झुलसती गर्मी से ग्रस्त है और मध्य मई में ही जून का अहसास हो रहा है। गर्म हवा के थपेड़ों से जहां आम आदमी परेशान हो रहा है वहीं खेतों की मिटटी से नमी भी गायब होती जा रही है। 

रासायनिक उर्वरकों के अभाव, अल नीनो मौसम चक्र के संभावित प्रकोप तथा बांधों-जलाशयों में पानी के घटते स्तर से इस वर्ष खरीफ फसलों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जबकि उससे पूर्व भीषण गर्मी से किसानों के साथ-साथ सरकार की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

मतलब साफ है। जब तक जोरदार वर्षा नहीं होगी तब तक खरीफ फसलों की बिजाई शुरू करने में किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। मानसून की बौछार ज्यादा कारगर साबित नहीं होगी। इस बौछार से तप्त धरती शीतल तो हो जाएगी लेकिन मिटटी में पर्याप्त नमी नहीं आ सकेगा। इसके लिए मूसलाधार बारिश की जरूरत पड़ेगी। धान की खेती के लिए खेतों में पानी का जमाव होना जरुरी है।

इसी तरह समुचित नमी वाले खेतों में ही दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं कपास की बिजाई संभव हो सकती है अन्यथा बीज में अंकुरण नहीं होने की समस्या बनी रहेगी। गन्ना की फसल को भी अच्छी वर्षा की आवश्यकता है। सरकार ने आगामी संकट को देखते हुए चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। गैर कुछ और नीतिगत निर्णय हो सकते हैं।