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07-Oct-2026 12:39 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार माह- जून से सितम्बर की अवधि के दौरान दीर्घकालीन औसत के मुकाबले करीब 13 प्रतिशत का खर्च होने से खरीफ फसलों के उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार पिछले 11 वर्षों में यानी वर्ष 2015 के बाद इस बार देश में सबसे कम बारिश हुई है। वर्ष 2026 का मानसून वर्ष 2001 के बाद का दूसरा सबसे कमजोर मानसून रहा जबकि वर्ष 1901 के बाद इस बार देश में चौथी सबसे कम बारिश हुई है।
मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून से 30 सितम्बर के दौरान देश में कुल 759.4 मि०मी० बारिश हुई जो दीर्घकालीन औसत 868.6 मि०मी० की 87 प्रतिशत रही। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्षा का वितरण काफी हद तक असमान रहा जिससे कुछ भागों में अच्छी बारिश हुई जबकि कुछ हिस्से भयंकर सूखे की चपेट में फंस गए। सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खरीफ फसलों की हालत काफी कमजोर बताई जा रही है।
हालांकि खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से करीब 12 लाख हेक्टेयर पीछे रह गया मगर पंचवर्षीय, औसत क्षेत्रफल से काफी ऊपर रहा। बारिश की कमी एवं मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना सहित कुछ अन्य राज्यों में खरीफ कालीन फसलों खासकर दलहन-तिलहन, धान, कपास एवं गन्ना की औसत उपज दर में गिरावट आने तथा इसकी क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है। नई फसल की छिटपुट कटाई-तैयारी आरंभ हो गई है। कुछ इलाकों में खेतों की मिटटी में नमी का अभाव होने से रबी फसलों की बिजाई में कठिनाई हो सकती है।