मलेशियाई पाम तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना

20-Jan-2025 11:56 AM

कुआलालम्पुर । मलेशिया में पाम तेल का वायदा भाव काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा है जिससे इसके निर्यात में गिरावट आने तथा बकाया स्टॉक में बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे हैं। इसके फलस्वरूप कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

सबसे प्रमुख आयातक देश- भारत में मलेशियाई पाम तेल का आयात दिसम्बर में काफी घट गया और जनवरी में भी इसमें भारी गिरावट आने की संभावना है।

इस बीच मलेशिया सरकार ने दिसम्बर तथा जनवरी की भांति फरवरी 2025 के लिए भी क्रूड पाम तेल (सीपीओ) पर निर्यात शुल्क को 10 प्रतिशत के शीर्ष स्तर पर बरकरार रखा है जिससे उसका निर्यात ऑफर मूल्य नीचे आना मुश्किल लगता है।

सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल की तुलना में पाम तेल का भाव ऊंचा चल रहा है। इससे भारतीय रिफाइनर्स की प्राथमिकता बदल गई है। 

मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड (एम्पोब) द्वारा पिछले सप्ताह जारी एक सर्कुलर से पता चलता है कि यद्यपि सीपीओ का रिफ्रेंस मूल्य जनवरी के 5001.72 रिंगिट प्रति टन की तुलना में फरवरी के लिए 4817.70 रिंगिट (1071.79 डॉलर) प्रति टन आंका  गया लेकिन फिर भी यह 4050 रिंगिट प्रति टन से ऊंचा होने के कारण इस पर 10 प्रतिशत का निर्यात शुल्क बरकरार रखा गया है।

नियमानुसार मलेशिया में जब रिफ्रेंस मूल्य 4050 रिंगिट या उससे ऊपर आंका जाता है तब उस पर 10 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लागू हो जाता है। भारत में जनवरी 2025 के दौरान पाम तेल का कुल आयात घटकर 4 लाख टन से नीचे आने का अनुमान है।