मक्का से निर्मित एथनॉल का मूल्य बढ़ने के बावजूद अन्य फसलों में किसानों की रूचि कायम

30-Jan-2026 05:10 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा मक्का का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी तथा तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए मक्का से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य में निरन्तर वृद्धि करना भी शामिल है ताकि इसकी मांग एवं खपत में इजाफा हो सके और किसानों को बेहतर आमदनी प्राप्त हो सके।

इससे मक्का के बिजाई क्षेत्र में सुधार आ रहा है लेकिन अन्य फसलों और खासकर धान तथा गेहूं की खेती के प्रति किसानों के उत्साह एवं आकर्षण में कोई कमी नहीं आई है।

इसके बजाए दलहन-तिलहन की बिजाई आंशिक रूप से प्रभावित हो रही है और सरकार की फसल विविधिकरण योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। 

संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में खुलासा किया गया है कि वित्त वर्ष 2024 -25 तक मक्का से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य में सालाना औसतन 11.7 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई लेकिन पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का कार्यक्रम भी मक्का का उत्पादन क्षेत्र तेजी से बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो सका।

धान के क्षेत्रफल में कटौती करने की सरकारी योजना भी सफल नहीं हो सकी। 2025-26 के खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से बढ़कर 441 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया और रबी सीजन में भी रकबा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

इसी तरह गेहूं का बिजाई क्षेत्र उछलकर 334 लाख हेक्टेयर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा जो पिछले साल के क्षेत्रफल 328 लाख हेक्टेयर से 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा। 

बेशक सरकार प्रत्येक साल एथनॉल की कीमतों का निर्धारण करती है लेकिन एथनॉल निर्माताओं के लिए किसानों से एमएसपी पर मक्का खरीदना अनिवार्य  वे प्रचलित बाजार मूल्य पर ही इसकी खरीद करते हैं।

खुले बाजार में मक्का का भाव ऊपर नीचे होता रहता है। इसकी सरकारी खरीद भी बहुत कम होती है। दूसरी ओर सरकार केन्द्रीय पूल के लिए धान और गेहूं की विशाल खरीद करती है जिससे किसानों को अपने खाद्यान्न का एक निश्चित मूल्य प्राप्त होने का भरोसा रहता है।