मक्का का भाव सुधारने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता
28-Nov-2025 06:03 PM
नई दिल्ली। जिस एथनॉल उद्योग की जबरदस्त मांग की उम्मीद से किसानों ने 2025 को खरीफ सीजन में मक्का का बिजाई क्षेत्र बढ़ाकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाया उसी उद्योग की सीमित खरीदारी से उत्पादकों को भारी निराशा भी हो रही है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने मक्का से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य में अच्छा इजाफा कर दिया है और तेल विपणन कम्पनियों ने एथनॉल की आपूर्ति का सबसे ज्यादा कोटा भी इसी एथनॉल के लिए आवंटित किया है लेकिन डिस्टीलरीज द्वारा मक्का की खरीद बहुत धीमी गति से की जा रही है जबकि पॉल्ट्री उद्योग भी इसकी खरीद में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहा है।
भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता की घोषणा शीघ्र ही होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। अमरीका ने संकेत दिया था कि नवम्बर 2025 के अंत तक इस करार पर दोनों तरफ से हस्ताक्षर हो सकते हैं। पॉल्ट्री तथा एथनॉल उद्योग को इस समझौते की घोषणा का इंतजार है।
वह यह जानने को उत्सुक है कि इस संधि के तहत भारत सरकार ने अमरीका से सस्ते जीएम मक्का के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है या नहीं। औपचारिक घोषणा के बाद ही इसकी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी। यदि जीएम मक्का के आयात की स्वीकृति नहीं दी गई तो दिसम्बर से मक्का की खरीद में एथनॉल निर्माताओं की सक्रियता बढ़ सकती है।
वैसे भी खरीफ कालीन मक्का के शानदार घरेलू उत्पादन को देखते हुए एथनॉल निर्माता इसकी खरीद में जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहेंगे क्योंकि पेट्रोलियम कंपनियों को इसकी आपूर्ति धीरे-धीरे और कई महीनों में की जानी है।
यदि मक्का की जल्दी-जल्दी भारी खरीद की गई तो इसकी कीमत तेज हो जाएगी और एथनॉल निर्मातओं का लाभांश (मार्जिन) घट सकता है। पॉल्ट्री उद्योग को भी मक्का के कमजोर मूल्य से राहत मिल रही है।
देश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में नए मक्के की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई है जबकि मांग कमजोर रहने से कीमतों में भारी गिरावट आ गई है।
सरकार को बाजार में हस्तक्षेप करके अपनी एजेंसियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्का की विशाल खरीद शुरू करनी चाहिए ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान होने से बचाया जा सके।
