महाराष्ट्र में रबी फसलों की बिजाई पर रहेगी गहरी नजर
28-Nov-2025 08:49 PM
मुम्बई। महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अत्यन्त मूसलाधार वर्षा हुई और सारे नदी-नाले तथा बांध-सरोवर पानी से लबालब भर गए।
अनेक खेतों में फसलें जलमग्न हो गई थीं और खरीफ उत्पादन में गिरावट की आशंका बढ़ गई। राज्य के अनेक निचले इलाकों में खेतों में अब भी या तो पानी मौजूद है या नमी का अंश इतना ऊंचा है कि उसमें रबी फसलों की बिजाई में किसानों को कठिनाई हो रही है।
चूंकि महाराष्ट्र भी रबी फसलों का एक महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य है जहां खासकर गेहूं, ज्वार, मक्का एवं चना आदि की खेती बड़े पैमाने पर होती है इसलिए वहां बिजाई की स्थिति और प्रगति पर गहरी नजर रखी जा रही है।
लगभग सभी रबी फसलों की बिजाई आरंभ हो चुकी है मगर तिलहनों की रफ्तार धीमी है। वैसे भी महाराष्ट्र रबी कालीन तिलहन के शीर्ष उत्पादक राज्यों में शामिल नहीं है क्योंकि वहां सरसों का उत्पादन नहीं या नगण्य होता है। लेकिन चना का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
24 नवम्बर तक के आंकड़ों से पता चलता है कि महाराष्ट्र में रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 24.23 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 26 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसके तहत अनाजी फसलों का रकबा तो 13.46 लाख हेक्टेयर के गत वर्ष के बराबर ही रहा और तिलहन फसलों के रकबे में भी कोई खास बढ़ोत्तरी नहीं हुई मगर दलहन फसलों का क्षेत्रफल 10.59 लाख हेक्टेयर से उछलकर 12.35 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसके तहत खासकर चना का उत्पादन क्षेत्र 10.32 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.92 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का रकबा 27 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 43 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
अनाजी फसलों में ज्वार का बिजाई क्षेत्र तो गत वर्ष के 10.01 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 8.28 लाख हेक्टेयर पर अटक गया लेकिन गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 2.09 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.02 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 1.34 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.11 लाख हेक्टेयर हो गया। विभिन्न फसलों की बिजाई वहां अभी जारी है।
