मूंगफली एवं सोयाबीन की कम बिजाई से तिलहनों का रकबा घटा
21-Jul-2026 01:09 PM
नई दिल्ली। खरीफ सीजन की दो सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सोयाबीन एवं मूंगफली की बिजाई इस बार कम क्षेत्रफल में होने से खरीफ कालीन तिलहनों का कुल उत्पादन क्षेत्र 17 जुलाई तक घटकर 147.09 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 155.72 लाख हेक्टेयर से 8.63 लाख हेक्टेयर कम है। सोयाबीन एवं मूंगफली की बिजाई अंतिम चरण में पहुंच गई है जबकि अरंडी, तिल एवं सूरजमुखी की बिजाई भी जारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 111.05 लाख हेक्टयर से लुढ़ककर 106.02 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 37.69 लाख हेक्टेयर से घटकर 34.52 लाख हेक्टेयर तथा तिल का क्षेत्रफल 5.95 लाख हेक्टेयर से गिरकर 5.12 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया मगर सूरजमुखी का रकबा 53 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 88 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। मानसून की प्रगति से देश के विभिन्न भागों में अच्छी बारिश होने के कारण तिलहन फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष तिलहन उत्पादक राज्यों में मानसून की पर्याप्त वर्षा नहीं होने से इस बार न केवल फसलों की बिजाई देर से शुरू हुई बल्कि इसकी रफ्तार भी धीमी रही। गुजरात में मूंगफली एवं राजस्थान में सोयाबीन का रकबा घट गया। सभी तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से पीछे चल रहा है।
तिलहनों का रकबा घटने से उत्पादन में कमी आ सकती है जिससे खाद्य तेलों का आयात बढ़ सकता है। अगस्त-सितम्बर का मौसम भी तिलहन फसलों को काफी हद तक प्रभावित करेगा। सोयाबीन की अगैती बिजाई वाली फसल की कटाई-तैयारी सितम्बर के तीसरे-चौथे सप्ताह में आरंभ हो जाएगी।
